
आवारा कुत्तों के मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
आवारा कुत्तों के मामले पर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू हुई। tजस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ मामले की सुनवाई कर रही है। एक वकील ने वरिष्ठ वरिष्ठ महेश जेठमलानी के लिए सुनवाई टालने करने का अनुरोध किया। सुप्रीम कोर्ट ने अनुरोध अस्वीकार किया, वकील ने कहा कि उनके पास कुछ आंकड़े हैं। जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा कि हमें एक नोट दीजिए, हम आज निजी पक्ष की दलीलें पूरी कर लेंगे और फिर राज्य पक्ष को एक दिन का समय देंगे।
भारती त्यागी के वकील ने कहा कि मैंने इस मुद्दे से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय न्यायक्षेत्रों द्वारा अपनाए जा रहे उपायों पर एक नोट दिया है, नीदरलैंड इसका एक सफल उदाहरण है। जानवरों को छोड़ने से रोकने के लिए नीदरलैंड का मॉडल अपनाया गया है
वकील हर्ष जैदका ने कहा कि मेरी चिंता अलग है। मेरे इलाके में बहुत सारे आवारा कुत्ते हैं, पूरी तरह से अशांति है मुझे, नींद की समस्या होने लगी है और बच्चे पढ़ाई नहीं कर पा रहे हैं। अधिकारियों ने कोई कार्रवाई नहीं की। उन्होंने कहा कि हम केवल टीकाकरण और नसबंदी कर सकते हैं।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य आयोग ने भी कोई कार्रवाई नहीं की है, उपद्रव होने पर आवारा कुत्तों को हटाया जा सकता है। वकील प्रशांत भूषण ने आगे कहा कि कुत्तों का अल्ट्रासाउंड भी किया जा सकता है। इसपर जस्टिस संदीप मेहता ने कहा कि हम कुत्ते को प्रमाण पत्र ले जाने के लिए क्यों नहीं कह सकते? इसपर भूषण ने कहा कि मैं कहना चाहता हूं कि सुनवाई के दौरान जजों ने कुछ टिप्पणियां की हैं,जिनमें से कुछ का गलत अर्थ निकाला गया है।
इसपर जस्टिस संदीप मेहता ने कहा कि कोई बात नहीं, तर्क अव्यावहारिक हैं। भूषण ने कहा कि कभी-कभी कोर्ट की टिप्पणियों के गंभीर परिणाम हो जाते हैं। जैसे मान लीजिए पीठ ने व्यंग्यपूर्वक टिप्पणी की कि दाना चुगली करने वालों को जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए, इसकी रिपोर्ट प्रकाशित हुई। जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा कि नहीं नहीं, बिल्कुल भी व्यंग्यपूर्ण नहीं था। हम गंभीर थे, हमें नहीं पता कि हम क्या करेंगे, लेकिन हम गंभीर थे।
वरिष्ठ वकील राजू रामचंद्रन ने कहा कि बार के सदस्य के रूप में मैं भी इस पर कुछ कहना चाहता हूं। कार्यवाही का टेलीविजन पर प्रसारण होता है। बार और पीठ दोनों का कर्तव्य है कि वे सतर्क रहें। जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा कि हम जानते हैं, इसे ध्यान में रखते हुए हम ऐसा करने से बच रहे हैं।






































