पश्चिम एशिया में तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से पूरी दुनिया में ऊर्जा संकट गहरा गया था। कई देशों में पेट्रोल-डीजल और गैस की कीमतों में भारी उछाल देखने को मिला। लेकिन भारत, जो अपनी जरूरत का करीब 85% कच्चा तेल आयात करता है, इस बड़े संकट के बावजूद न तो गंभीर ईंधन संकट का सामना करना पड़ा और न ही कीमतों में दुनिया जैसी बड़ी बढ़ोतरी हुई। आखिर ऐसा कैसे संभव हुआ? पूर्व राजदूत और पेट्रोलियम मंत्रालय में संयुक्त सचिव (IC) रहे सुंजय सुधीर ने इसकी पूरी रणनीति बताई है।
होर्मुज पर निर्भरता के बावजूद कैसे बचा भारत?
सुंजय सुधीर के मुताबिक भारत की करीब 90% LPG, 60% LNG और लगभग 40% कच्चे तेल की आपूर्ति मध्य पूर्व और होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते होती है। ऐसे में अगर यह रास्ता लंबे समय तक बंद रहता, तो देश की अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर पड़ सकता था। हालांकि सरकार ने हालात बिगड़ते ही कई प्रशासनिक कदम उठाए और पहले से तैयार आपूर्ति व्यवस्था का फायदा मिला। पिछले कई वर्षों में भारत ने अलग-अलग देशों से कच्चा तेल खरीदने की रणनीति अपनाई थी, जिससे किसी एक क्षेत्र पर निर्भरता कम हुई।
नए सप्लायर्स और मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर बना ताकत
भारत ने पिछले दो दशकों में तेल और गैस के नए सप्लायर्स तलाशे। इसके साथ ही LPG आयात टर्मिनल, पाइपलाइन नेटवर्क और सिटी गैस वितरण प्रणाली का लगातार विस्तार किया गया। घरेलू गैस के इस्तेमाल को बढ़ावा मिलने से भी ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव कम हुआ। यही वजह रही कि वैश्विक संकट के दौरान भी देश में ईंधन की उपलब्धता बनी रही और किसी तरह की आपातकालीन राशनिंग की जरूरत नहीं पड़ी।
दुनिया में 30% तक बढ़े दाम, भारत में सिर्फ 7% की बढ़ोतरी
संकट के दौरान कई देशों में ईंधन की कीमतें 25 से 30 प्रतिशत तक बढ़ गईं, लेकिन भारत में कीमतों में बढ़ोतरी करीब 7 प्रतिशत तक सीमित रही। सुंजय सुधीर के अनुसार सरकार ने एक साथ सप्लाई और डिमांड दोनों पक्षों पर काम किया। घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दी गई, ताकि आम लोगों पर महंगाई का बोझ कम पड़े।
सरकार ने उठाया बड़ा आर्थिक बोझ
ईंधन की कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में कटौती की। वहीं सरकारी तेल कंपनियों को हर महीने करीब 30,000 करोड़ रुपये की अंडर-रिकवरी का सामना करना पड़ा। उन्होंने बताया कि उस समय सरकार को प्रति लीटर पेट्रोल पर लगभग 24 रुपये और डीजल पर करीब 30 रुपये तक का नुकसान उठाना पड़ा। इसके बावजूद सरकार ने आम उपभोक्ताओं पर पूरा बोझ नहीं डाला, ताकि महंगाई और अर्थव्यवस्था दोनों को स्थिर रखा जा सके।
निर्यात पर लगाया गया विशेष शुल्क
सरकार ने संकट के दौरान पेट्रोल, डीजल और एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) के निर्यात पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क भी लगाया। इसके तहत पेट्रोल पर 4 रुपये प्रति लीटर, डीजल पर 8.5 रुपये प्रति लीटर और ATF पर 7.5 रुपये प्रति लीटर का विशेष शुल्क लगाया गया। हालांकि घरेलू बाजार में बिकने वाले पेट्रोल और डीजल पर मौजूदा एक्साइज ड्यूटी में कोई बदलाव नहीं किया गया।






































