केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि पेट्रोल, डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) को लागत से कम दाम पर बेचने से हो रहे भारी नुकसान की भरपाई के लिए सरकारी तेल विपणन कंपनियों को कोई वित्तीय सहायता नहीं दी जाएगी।पेट्रियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने सोमवार को जारी एक आधिकारिक बयान में कहा कि फिलहाल सरकार के पास तेल कंपनियों के नुकसान की भरपाई के लिए कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।
भारी नुकसान झेल रही हैं तेल कंपनियां
इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के बावजूद पिछले चार साल से पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतें लगभग स्थिर रखने का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने के बावजूद सरकार ने लाभार्थियों पर इसका पूरा बोझ नहीं डाला। नतीजतन, कंपनियों को पेट्रोल और डीजल पर 25-28 रुपये प्रति लीटर तक की अंडर-रिकवरी (नुकसान) झेलनी पड़ रही है।
ATF पर भी पहली बार नुकसान
एविएशन क्षेत्र में भी दो दशकों बाद पहली बार ATF की बिक्री पर नुकसान दर्ज किया जा रहा है। घरेलू एयरलाइंस के लिए ATF की कीमतों में केवल आंशिक बढ़ोतरी की गई है, जबकि विदेशी एयरलाइंस के लिए दरें ज्यादा बढ़ाई गई हैं। एलपीजी क्षेत्र में भी स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत में मार्च में 60 रुपये की बढ़ोतरी की गई थी, लेकिन यह लागत की पूरी भरपाई के लिए पर्याप्त नहीं है।
उपभोक्ताओं को राहत की प्राथमिकता
सरकार ने महंगाई को नियंत्रित रखने और आम उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ कम करने के लिए पेट्रोल, डीजल और घरेलू एलपीजी की कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं की है। केवल औद्योगिक डीजल और व्यावसायिक एलपीजी जैसी गैर-संवेदनशील श्रेणियों में ही सीमित संशोधन किए गए हैं। सरकारी बयान में कहा गया है कि इन उपायों का मकसद उपभोक्ताओं को राहत प्रदान करना और मुद्रास्फीति को काबू में रखना है।







































