अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दौर में लगाए गए टैरिफ को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। मामला उन अरबों डॉलर के टैरिफ का है, जो अमेरिकी कंपनियों और आयातकों ने सरकार को चुकाए थे। हाल ही में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने माना कि कई मामलों में लगाए गए एक्स्ट्रा टैरिफ कानूनी रूप से सही नहीं थे। इसके बाद सवाल उठने लगा कि अब यह पैसा किसे वापस मिलेगा। क्या सभी आयातकों को रिफंड मिलेगा या केवल उन कंपनियों को जिन्होंने अदालत में सरकार के खिलाफ मुकदमा दायर किया था?
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद शुरू हुआ विवाद
हाल ही में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने माना कि ट्रंप प्रशासन द्वारा कई देशों से आने वाले सामानों पर लगाए गए एक्स्ट्रा टैरिफ कानूनी रूप से सही नहीं थे। इसके बाद उन कंपनियों को पैसा लौटाने की प्रक्रिया शुरू हुई, जिन्होंने यह फीस चुकायी थी। अब अमेरिकी कस्टम्स एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन (CBP) रिफंड देने के लिए एक ऑनलाइन सिस्टम चला रहा है। लेकिन इस बात पर विवाद बढ़ गया है कि रिफंड सिर्फ उन्हीं कंपनियों को मिले, जिन्होंने अदालत में मुकदमा दायर किया था या फिर उन सभी आयातकों को, जिन्होंने एक्स्ट्रा टैरिफ भरा था।
जज ने सरकार से मांगा जवाब
न्यूयॉर्क स्थित कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड के जज रिचर्ड ईटन ने इस मामले में सुनवाई के दौरान सरकार से कई सवाल पूछे। उन्होंने कहा कि सरकार ने रिफंड प्रक्रिया के लिए अच्छा ऑनलाइन सिस्टम तैयार किया है और ऐसा लगता है कि वह सभी पात्र कंपनियों को पैसा लौटाना चाहती है। हालांकि जज ने यह भी कहा कि न्याय विभाग की कानूनी दलीलें रिफंड प्रक्रिया को कठिन बना सकती हैं। उनके अनुसार, कभी-कभी कानूनी लड़ाई में अपनाया गया रुख सरकार के हित में भी नहीं होता।
किसे मिलेगा सबसे ज्यादा फायदा?
अगर अदालत यह फैसला देती है कि सभी प्रभावित आयातकों को रिफंड मिलेगा, तो हजारों कंपनियों को अरबों डॉलर वापस मिल सकते हैं। इससे उन व्यवसायों को सबसे ज्यादा फायदा होगा जिन्होंने पिछले वर्षों में भारी मात्रा में आयात किया था और एक्स्ट्रा टैरिफ का बोझ उठाया था। वहीं यदि न्याय विभाग की दलील मान ली जाती है, तो केवल वही कंपनियां रिफंड मांग सकेंगी जो पहले से इस मामले में अदालत पहुंची थीं। ऐसे में बड़ी संख्या में आयातक इस लाभ से वंचित रह सकते हैं।
अब अपील कोर्ट के हाथ में फैसला
फिलहाल यह मामला अमेरिकी कोर्ट ऑफ अपील्स के पास पहुंच चुका है। यही अदालत तय करेगी कि रिफंड का दायरा कितना बड़ा होगा और किन कंपनियों को इसका लाभ मिलेगा।







































