अमेरिका-ईरान शांति समझौते में संभावित अड़चन और दक्षिण-पश्चिम मानसून की कमजोरी से भारत की आर्थिक वृद्धि और महंगाई पर दबाव पड़ सकता है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के एक बुलेटिन में सोमवार को ये आशंका जताई गई। जून के बुलेटिन में ‘अर्थव्यवस्था की स्थिति’ नाम से प्रकाशित एक लेख में कहा गया है कि पश्चिम एशिया में अंतरिम शांति समझौता होने के बावजूद भू-राजनीतिक तनाव और व्यापार से जुड़े गतिरोध कायम हैं।
अमेरिका-ईरान समझौता टूटा तो क्या होगा
बुलेटिन के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच अस्थायी समझौते से कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन वैश्विक आर्थिक परिदृश्य अब भी कमजोर बना हुआ है। लेख में कहा गया है, ”अगर ये समझौता टूटता है तो महंगाई में उछाल, ऊर्जा आपूर्ति में बाधा, निवेश में देरी, खाद्य सुरक्षा संबंधी चिंताएं और वित्तीय अस्थिरता जैसे जोखिम फिर से बढ़ सकते हैं, जिससे वृद्धि दर पर भी दबाव आ सकता है।”
फिलहाल नियंत्रण में है खुदरा महंगाई
इस चुनौतीपूर्ण वैश्विक माहौल के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था ने 2025-26 की चौथी तिमाही में 7.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की, जिसे निजी खपत और स्थायी निवेश से समर्थन मिला। आरबीआई बुलेटिन के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 के शुरुआती दो महीनों के उच्च-आवृत्ति संकेतक आर्थिक गतिविधियों में निरंतर मजबूती का संकेत देते हैं। हालांकि, मई में कुछ तेजी के बावजूद उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित खुदरा महंगाई दर नियंत्रित दायरे में बनी हुई है।
भारत का बाहरी क्षेत्र अभी भी मजबूत
प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) प्रवाह और पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार के दम पर भारत का बाहरी क्षेत्र अभी भी मजबूत बना हुआ है। आरबीआई लेख के मुताबिक, ”मौजूदा वैश्विक अस्थिरता के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था ने झटके सहने के मामले में कई दूसरे देशों की तुलना में मजबूत बुनियादी स्थिति के साथ इस दौर में कदम रखा।”
कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतें बढ़ने से बढ़ी महंगाई
हालांकि, कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी का असर ‘रेस्टॉरेंट और हॉस्टल ‘ श्रेणी में महंगाई बढ़ने के रूप में दिखा। मई में 12 में से 8 श्रेणियों में महंगाई में क्रमिक बढ़ोतरी दर्ज की गई। खाने-पीने की चीजों में भी बढ़ती महंगाई देखी गई, जिसका कारण गर्मियों के दौरान असामान्य मौसमी रुझान रहा। चावल, गेहूं और दालों की कीमतों में तेजी आई, जबकि आलू, प्याज और टमाटर जैसी प्रमुख सब्जियों के दाम भी बढ़े। खाद्य तेलों की कीमतों में भी मासिक आधार पर खासी तेजी देखी गई।
कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से महंगा हुआ पेट्रोल-डीजल
ऊर्जा आपूर्ति शृंखला में गतिरोध की वजह से कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहीं, लेकिन जून में इनमें कुछ नरमी आई है। कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उछाल का सीधा असर खुदरा कीमतों पर भी पड़ा। जिसकी वजह से मई में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 4 बार में क्रमशः लगभग 7.5 रुपये और 7.6 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई। केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट किया कि बुलेटिन में व्यक्त विचार लेखकों के निजी मत हैं और ये आरबीआई के आधिकारिक विचार नहीं हैं।
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