देश का विदेशी मुद्रा भंडार 3 जुलाई को खत्म हुए सप्ताह में 7.26 अरब डॉलर बढ़कर 674.19 अरब डॉलर हो गया। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने शुक्रवार को ये जानकारी दी। इससे पिछले सप्ताह में देश का विदेशी मुद्रा भंडार 5.65 अरब डॉलर घटकर 666.93 अरब डॉलर पर आ गया था। बताते चलें कि इस साल 27 फरवरी को खत्म हुए सप्ताह में पश्चिम एशिया संघर्ष शुरू होने से पहले, देश का विदेशी मुद्रा भंडार बढ़कर 728.49 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था।
पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने से रुपये पर आ गया था जबरदस्त दबाव
हालांकि, पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष बढ़ने के बाद रुपये पर दबाव बढ़ा और आरबीआई को विदेशी मुद्रा बाजार में डॉलर बेचकर हस्तक्षेप करना पड़ा, जिससे इसके बाद कई सप्ताह तक विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट दर्ज की गई। केंद्रीय बैंक के आंकड़ों के अनुसार, 3 जुलाई को खत्म हुए सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार के प्रमुख घटक विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां 4.51 अरब डॉलर बढ़कर 545.578 अरब डॉलर हो गई। डॉलर के संदर्भ में दर्शाई जाने वाली विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में विदेशी मुद्रा भंडार में रखी गई यूरो, पाउंड और येन जैसी गैर-अमेरिकी मुद्राओं के मूल्य में होने वाली बढ़ोतरी या गिरावट का प्रभाव भी शामिल होता है।
भारत के गोल्ड रिजर्व की वैल्यू में 2.67 अरब डॉलर की बढ़ोतरी
आरबीआई ने कहा कि समीक्षाधीन सप्ताह में देश के गोल्ड रिजर्व का मूल्य 2.67 अरब डॉलर बढ़कर 105.20 अरब डॉलर हो गया। केंद्रीय बैंक ने कहा कि विशेष आहरण अधिकार (एसडीआर) 6.5 करोड़ डॉलर बढ़कर 18.62 अरब डॉलर हो गया। केंद्रीय बैंक के आंकड़ों के अनुसार, समीक्षाधीन सप्ताह के अंत में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के पास भारत की आरक्षित कोष भी 1.5 करोड़ डॉलर बढ़कर 4.79 अरब डॉलर हो गया।
पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने से 1.90 लाख करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा की बचत
सरकार ने शुक्रवार को बताया कि पेट्रोल में एथनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम से न सिर्फ चीनी उद्योग को मजबूती मिली है, बल्कि किसानों की आय बढ़ी है और 2014-15 से अब तक देश को 1.90 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की विदेशी मुद्रा की बचत हुई है। खाद्य मंत्रालय में संयुक्त सचिव अश्विनी श्रीवास्तव ने ‘अनाज एथनॉल विनिर्माता संघ’ (GEMA) के एक सम्मेलन में कहा कि पेट्रोल में इथेनॉल ब्लेंडिंग से कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम हुई है। उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2014-15 से 2026 के बीच इथेनॉल सप्लाई के जरिए 310 लाख टन से ज्यादा कच्चे तेल की जरूरत कम हुई है, जिससे 1.90 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की विदेशी मुद्रा की बचत हुई।
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