भारत में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून ने ज़बरदस्त वापसी की है। कई हफ़्तों की कुछ राज्यों में हुई झमाझम बारिश के बाद अब मौसम का मिजाज बदलने वाला है। वैसे, देश में सामान्य से मौसमी बारिश का अंतर (डिपार्चर) सुधरकर -14.3% हो गया है, जिससे यह फिर से ‘सामान्य’ श्रेणी में आ गया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, यह बदलाव तब आया है जब देश में लगातार नौ दिनों तक रोज़ाना होने वाली बारिश का स्तर औसत से ज़्यादा रहा है।बारिश में हुई इस ताज़ा बढ़ोतरी ने जून में बनी बारिश की भारी कमी को काफ़ी हद तक दूर कर दिया है।
मौसम फिर से बदलने वाला है
जून में केरल में मॉनसून के आने के बाद यह लगभग तीन हफ़्तों तक रुका रहा था। जुलाई की शुरुआत में मध्य भारत और बंगाल की खाड़ी में बने कम दबाव वाले सिस्टम की वजह से मॉनसून की गतिविधि फिर से तेज़ हुई, जिससे पश्चिमी, मध्य और उत्तरी भारत में व्यापक बारिश हुई। जुलाई की शुरुआत से ही रोज़ाना होने वाली औसत बारिश लंबे समय के औसत से ज़्यादा रही है। इससे जलाशयों में पानी का स्तर बढ़ा है, मिट्टी में नमी आई है और कई राज्यों में खरीफ़ की बुवाई में तेज़ी आई है। हालांकि, मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि यह सुधार कुछ ही समय के लिए हो सकता है।
कहीं कहीं होगी झमाझम बारिश
मौसम विभाग ने कहा है, मानसून अगले कुछ दिनों के लिए अपना रुख बदलने जा रहा है क्योंकि उत्तर और मध्य भारत में लगातार सक्रिय रहने के बाद ट्रफ लाइन अब उत्तर की ओर खिसक रही है, जिसके चलते पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान, गुजरात, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र एवं पश्चिमी मध्य प्रदेश के बड़े हिस्से में वर्षा की स्थितियां कमजोर पड़ जाएंगी। हालांकि विभाग के मुताबिक हिमाचल, उत्तराखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, ओडिशा, बंगाल एवं पूर्वोत्तर राज्यों में ज्यादा बारिश होने की संभावना है।
कहीं कहीं होगी कम बारिश
विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक मानसून ट्रफ दोबारा दक्षिण की ओर नहीं लौटती, तब तक उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में बारिश की संभावना कम रहेगी। ट्रफ के फिर से नीचे आने में चार से पांच दिन या उससे अधिक समय लग सकता है। अनुमान बताते हैं कि 10 जुलाई से 15 जुलाई के बीच उत्तर, पश्चिम और मध्य भारत (जिसमें पश्चिमी तट भी शामिल है) में बारिश की गतिविधि में काफ़ी कमी आएगी, क्योंकि अभी बना हुआ कम दबाव का क्षेत्र कमज़ोर पड़ रहा है और दूर जा रहा है।
सैटेलाइट तस्वीरों से भी पता चलता है कि देश के मुख्य मॉनसून वाले इलाके में बड़े पैमाने पर छाए बादलों में कमी आई है। उम्मीद के मुताबिक बारिश में आने वाली कमी से जुलाई के मध्य तक भारत में कुल मौसमी बारिश एक बार फिर सामान्य से कम के स्तर पर आ सकती है। बारिश का यह बदलता पैटर्न इक्वेटोरियल पैसिफ़िक में ‘अल नीनो’ की स्थितियों से भी मेल खाता है।
अल नीनो का इफेक्ट दिखेगा
सामान्य मॉनसून वाले सालों के उलट, ‘अल नीनो’ की वजह से अक्सर बड़े इलाकों में होने वाली बारिश में लंबे और बार-बार गैप आते हैं, जिससे मॉनसून के सक्रिय दौर में रुकावट आती है। पूरे मौसम में लगातार बारिश होने के बजाय, मौसम कभी बहुत ज़्यादा बारिश वाला तो कभी लंबे समय तक सूखा रहने वाला होता है। हालांकि हाल ही में हुई ज़बरदस्त बारिश से भारत में मौसम के हिसाब से पानी की स्थिति में काफ़ी सुधार हुआ है, लेकिन मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि मॉनसून अभी भी बहुत अनिश्चित बना हुआ है।







































