नई दिल्ली में आयोजित हो रहा 18वां ब्रिक्स सम्मेलन (BRICS Summit) भारत के आर्थिक भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होने जा रहा है। वैश्विक मंदी और अनिश्चितता के इस दौर में ब्रिक्स देशों का यह जमावड़ा भारतीय अर्थव्यवस्था को एक नई रफ्तार दे सकता है। इस महासम्मेलन से भारत को मिलने वाले आर्थिक फायदों पर आर्थिक मामलों के इकोनॉमिस्ट सुनील शाह और पंकज जैसवाल ने अपनी विस्तृत राय रखी है।
आर्थिक जानकारों के मुताबिक, ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से भारत को व्यापार, विदेशी निवेश और ऊर्जा सुरक्षा के मोर्चे पर कई बड़े फायदे मिल सकते हैं:
1. नए बाजारों की खोज
ब्रिक्स का विस्तार भारत के लिए निर्यात के नए दरवाजे खोल रहा है। रूस, चीन, यूएई, सऊदी अरब और अफ्रीकी देशों में भारतीय सामान और सेवाओं का निर्यात बढ़ाने का यह बेहतरीन मौका है। हालांकि, अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ के मामले में ब्रिक्स से सीधी राहत की उम्मीद नहीं है, लेकिन अन्य देशों में एक्सपोर्ट बढ़ाकर भारत अमेरिकी बाजार पर अपनी निर्भरता को काफी हद तक कम कर सकता है।
2. लोकल करेंसी और डिजिटल पेमेंट पर जोर
ग्लोबल ट्रेड में डॉलर के प्रभुत्व को चुनौती देने के लिए लोकल करेंसी (स्थानीय मुद्रा) में व्यापार को बढ़ावा दिया जा रहा है। रूस के साथ स्थानीय मुद्रा में व्यापार बढ़ने से पेमेंट की जटिलताएं दूर होंगी और क्रूड ऑयल जैसे जरूरी सामानों के आयात में मदद मिलेगी। वहीं, सीबीडीसी (CBDC) और डिजिटल पेमेंट मैकेनिज्म के जरिए ब्रिक्स देशों के बीच क्रॉस बॉर्डर पेमेंट को तेज और आसान बनाने पर तेजी से काम हो रहा है।
3. खाड़ी देशों से इंफ्रास्ट्रक्चर और मैन्युफैक्चरिंग में निवेश
सऊदी अरब और यूएई जैसे नए सदस्य देशों की मौजूदगी से भारत में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) बढ़ने की प्रबल संभावनाएं हैं। एक्सपर्ट्स के अनुसार, खाड़ी देश भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर, एनर्जी, लॉजिस्टिक्स और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर्स में बड़े कैपिटल निवेश करने के इच्छुक हैं।
4. भारत की एनर्जी सिक्योरिटी होगी मजबूत
ब्रिक्स समूह में दुनिया के सबसे बड़े तेल उत्पादक देश (जैसे रूस, सऊदी अरब और यूएई) शामिल हैं। इन देशों के साथ भारत के द्विपक्षीय और बहुपक्षीय रणनीतिक संबंध देश की लंबी अवधि की ऊर्जा सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिहाज से बेहद फायदेमंद साबित होंगे।
क्या आएगी ब्रिक्स की अपनी कॉमन करेंसी?
आर्थिक जानकारों का कहना है कि ब्रिक्स की अपनी कोई ‘कॉमन करेंसी’ तुरंत लॉन्च होने की संभावना काफी कम है। फिलहाल सदस्य देशों का पूरा ध्यान अपनी-अपनी स्थानीय मुद्राओं में व्यापार करने और डिजिटल पेमेंट सिस्टम को मजबूत बनाने पर केंद्रित है।
यह भी पढ़ें- BRICS शिखर सम्मेलन में शामिल होने भारत आएंगे चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, हो गया कंफर्म







































