28 मिनट पहले
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वो दौर जब मोहब्बत खतों में लिखी जाती थी और प्यार का इजहार गानों में किया जाता था, तब परदे पर एक मुस्कुराता चेहरा आया, नाम है धर्मेंद्र। उनकी आंखों की चमक, उनकी सादगी और उनके गानों का जादू बस दिल में उतर जाता था।धर्मेंद्र के गाने सिर्फ सुने नहीं गए, उन्हें महसूस किया गया, जिया गया और उन पर थिरका गया, जिन्हें कई पीढ़ियां सदियों तक याद रखेंगी।
यह कहानी उन्हीं सुरों की महक की है, जो आज भी “पल पल दिल के पास” धड़कती है, जिन सुरों ने थिरकना सिखाया और दोस्ती की नई परिभाषा बनाई-

गाना- मैं जट यमला पगला दीवाना, फिल्म- प्रतिज्ञा (1975)

गाना- ये दोस्ती हम नहीं तोड़ेंगे, फिल्म- शोले (1975)

गाना- पल पल दिल के पास, फिल्म- ब्लैकमेल (1973)

गाना- कोई हसीना जब रूठ जाती है, फिल्म- शोले (1975)

गाना- किसी शायर की गजल, फिल्म- ड्रीम गर्ल(1977)

गाना- मैं तेरे इश्क में मर न जाऊं कहीं, फिल्म- लोफर (1973)

गाना- अब के सजना सावन में, फिल्म- छोटी बहू (1971)

गाना- झिलमिल सितारों का आंगन होगा, फिल्म- जीवन मृत्यु (1970)

गाना- आज मौसम बड़ा बेईमान है बड़ा, फिल्म- लोफर (1973)

गाना- ओ मेरी महबूबा, फिल्म- धरम वीर 1977

गाना- मेरे दुश्मन तू मेरी दोस्ती को तरसे, फिल्म- आए दिन बहार के (1966)

गाना- ये दिल तुम बिन कहीं लगता नहीं, हम क्या करें, फिल्म- इज्जत (1968)

गाना- मिलती है जिंदगी में मोहब्बत कभी कभी, फिल्म- आंखें (1968)

गाना- गैरों पे करम अपनों पे सितम, फिल्म- आंखें (1968)

गाना- साथिया नहीं जाना कि जी न लगे, फिल्म- आया सावन झूम के (1969)

गाना- सोना ले जा रहे, चांदी ले जा रे, फिल्म- मेरा गांव मेरा देश (1971)






































