नई दिल्ली: प्रवर्तन निदेशानल (ED) ने ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट ऑथरिटी (GMADA) से जुड़े कथित बड़े भ्रष्टाचार मामलों में एक्शन तेज कर दिया है। ईडी ने दिल्ली, चंडीगढ़, मोहाली और लुधियाना में कई जगहों पर तलाशी ली है। बताया जा रहा है कि ED की टीमों ने GMADA के दफ्तर और पंजाब सरकार के हाउसिंग विभाग के प्रिंसिपल सेक्रेटरी विकास गर्ग, IAS से जुड़े दफ्तर में भी तलाशी ली। जांच एजेंसी का फोकस GMADA से जुड़े कई मामलों में रिकॉर्ड और दूसरे सबूत जुटाने पर है। इनमें GMADA की जमीन और प्रॉपर्टी की नीलामी से जुड़े मामले भी शामिल बताए जा रहे हैं।
कुछ 26 ठिकानों पर ED की सर्च
जानकारी के मुताबिक ईडी की टीम ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में दिल्ली, मोहाली, चंडीगढ़, पंचकूला और लुधियाना में 26 ठिकानों पर सर्च ऑपरेशन शुरू किया है। यह कार्रवाई M/s Tirupati Infraprojects Pvt. Ltd. से जुड़े मामले में की जा रही है। ED की कार्रवाई Tirupati Infraprojects Pvt. Ltd. के प्रमोटर्स, डायरेक्टर्स और उनसे जुड़े लोगों के अलावा Remigate Buildestates (India) Pvt. Ltd., MB Infrabuild Pvt. Ltd., Mera Baba Reality Associates Pvt. Ltd. और Mera Baba Infrastructure Pvt. Ltd. से जुड़े परिसरों पर भी हो रही है।
जीएमएडीए, आवास और शहरी विकास विभाग के दफ्तर में भी सर्च
पीएमएलए, 2002 की धारा 16 के तहत ग्रेटर मोहाली क्षेत्र विकास प्राधिकरण (जीएमएडीए) और पंजाब सरकार के आवास और शहरी विकास विभाग के कार्यालयों में भी सर्च जारी हैं। एजेंसी का उद्देश्य आरोपी कंपनियों और GMADA के बीच हुए लेन-देन से जुड़े दस्तावेज और अन्य सबूत जुटाना है। Tirupati Infraprojects Pvt. Ltd. भी CBI और ED केस में आरोपी है, जो नई दिल्ली के पश्चिम विहार में रेडिसन ब्लू होटल प्रोजेक्ट से जुड़े 290 करोड़ रुपये के बैंक फ्रॉड में शामिल है।
सरकारी खजाने को 100 करोड़ से ज्यादा का नुकसान
PMLA के तहत ED की जांच से पता चला है कि मेसर्स Tirupati Infraprojects Pvt. Ltd.के प्रमोटर मेसर्स Remigate Buildestates (India) Pvt. Ltd, मेसर्स MB Infrabuild Pvt. Ltd जैसी कंपनियों को भी कंट्रोल करते हैं, जिन्होंने GMADA से मोहाली में दो प्राइम ऑक्शन साइट्स खरीदीं और उसके बाद अथॉरिटी को देने वाले बकाये के संबंध में काफी फाइनेंशियल राहत हासिल की। एजेंसी के अनुसार, कंपनियों को हुए संदिग्ध अनुचित लाभ और सरकारी खजाने को हुए संभावित नुकसान की राशि 100 करोड़ रुपये से अधिक है।
कंसल्टेंसी फर्म की भी तलाशी
ED एक कंसल्टेंसी फर्म मेसर्स टीला कंसल्टेंट्स एंड कॉन्ट्रैक्टर्स प्राइवेट लिमिटेड की भी तलाशी ले रहा है, जो GMADA के अलग-अलग कंसल्टेंसी कामों को देखती है और इस स्कैम में बिचौलिए के तौर पर काम करने का शक है। GMADA ऑफिस और विकास गर्ग, IAS (प्रिंसिपल सेक्रेटरी, हाउसिंग डिपार्टमेंट) के ऑफिस में तलाशी ली गई, ताकि GMADA के कई घोटालों के सबूत मिल सकें, जिसमें GMADA ऑक्शन और बिल्डरों और डेवलपर्स से EDC और ब्याज माफ करना शामिल है।
ये भी पढ़ें:







































