
भारत में रिटायरमेंट के बाद आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रॉविडेंट फंड योजनाएं भारतीय निवेशकों के बीच बेहद लोकप्रिय हैं। इनमें मुख्य रूप से तीन प्रमुख विकल्प आते हैं-पब्लिक प्रॉविडेंट फंड यानी PPF, एम्प्लॉइज प्रॉविडेंट फंड यानी EPF और जनरल प्रॉविडेंट फंड यानी GPF। ये तीनों योजनाएं सुरक्षित निवेश, स्थिर रिटर्न और टैक्स बेनिफिट्स प्रदान करती हैं, लेकिन इनकी पात्रता, योगदान प्रक्रिया और ब्याज दरें अलग-अलग होती हैं। आइए जानते हैं इन तीनों योजनाओं के बीच मुख्य अंतर और यह भी कि कौन-सी योजना आपके लिए सबसे उपयुक्त है।
जनरल प्रॉविडेंट फंड यानी GPF
GPF एक सेवानिवृत्ति बचत योजना है, जो केवल सरकारी कर्मचारियों के लिए उपलब्ध है। कर्मचारी अपनी सैलरी का एक निश्चित हिस्सा हर महीने GPF खाते में जमा करते हैं। इस पर सरकार द्वारा निर्धारित ब्याज मिलता है, जो समय के साथ बढ़ता रहता है। सेवा समाप्ति या सेवानिवृत्ति के समय कर्मचारी को जमा राशि और ब्याज दोनों एक साथ प्राप्त होते हैं। angelone के मुताबिक, वर्तमान ब्याज दर (1 अक्टूबर 2024 से) 7.1% (सरकार द्वारा संशोधन के अधीन) प्रतिशत सालाना है।
पब्लिक प्रॉविडेंट फंड यानी PPF
PPF एक लंबी अवधि के लिए एक निवेश योजना है, जो सभी भारतीय नागरिकों के लिए खुली है, चाहे वे नौकरीपेशा हों, व्यवसायी हों या स्व-नियोजित। इस योजना की अवधि 15 वर्ष की होती है, जिसे हर 5 साल के लिए आगे बढ़ाया भी जा सकता है। इसके लिए पहले ही आवेदन होता है। पीपीएफ पर सरकार हर तिमाही ब्याज दर तय करती है। यह योजना न केवल सुरक्षित निवेश का विकल्प देती है, बल्कि आयकर में छूट (टैक्स बेनिफिट) भी प्रदान करती है। मौजूदा समय में ब्याज दर (1 अक्टूबर 2024 से) 7.1% (तिमाही आधार पर समीक्षा की जाती है) प्रतिशत है।
एम्प्लॉइज प्रॉविडेंट फंड यानी EPF
ईपीएफ योजना निजी क्षेत्र के उन वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए है, जिनके संगठन में 20 से अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं। इसमें कर्मचारी और नियोक्ता दोनों समान राशि का योगदान करते हैं। यह फंड कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) द्वारा संचालित किया जाता है। ईपीएफ में जमा राशि पर ब्याज मिलता है और यह सेवानिवृत्ति या नौकरी छोड़ने के बाद निकाली जा सकती है। वर्तमान समय में पीपीएफ पर ब्याज दर 8.25% प्रतिशत तय है, जिसे ईपीएफओ तय करता है।







































