2 मिनट पहले
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समय रैना और रणवीर अलाहबादिया, इंडियाज गॉट लेटेंट से विवादों में घिरे थे।
सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में रणवीर अलाहबादिया और समय रैना के खिलाफ चल रहे दिव्यांग लोगों का मजाक उड़ाने वाले मामले पर सुनवाई हुई। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट की बेंच के जस्टिस सूर्यकांत और जॉयमाल्या बागची ने कॉमेडियन्स को वीडियो बनाकर दिव्यांगजनों से माफी मांगने के आदेश दिए। साथ ही कहा कि एक गाइडलाइन तैयार की जाए, जिससे भविष्य में इस तरह दिव्यांग लोगों का मजाक उड़ाए जाने से बचा जा सके।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या आदेश दिए-
- यूट्यूबर समय रैना और रणवीर अलाहबादिया को वीडियो बनाकर सार्वजनिक रूप से अपने जोक्स पर माफी मांगनी होगी। ये वीडियोज संबंधित व्यक्ति अपने-अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स में पोस्ट करेंगे।
- आरोपी एक एविडेविट दाखिल करें, जिसमें वे बताएं कि अपने प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर वो किस तरह दिव्यांग लोगों के अधिकारों के प्रति जागरुकता फैलाने का काम करेंगे।
- कमर्शियल स्पीच से कॉमेडियन्स दूसरों की भावनाओं को ठेस पहुंचाने के लिए इस्तेमाल नहीं करेंगे।
- सुप्रीम कोर्ट ने मिनिस्ट्री ऑफ इन्फॉर्मेशन एंड ब्रॉडकास्ट को निर्देश दिए हैं कि वो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इस्तेमाल की जाने वाली भाषा के लिए एक गाइडलाइन तैयार करेंगे, जिससे सभी व्यक्ति, खासतौर पर दिव्यांगों की गरिमा का सम्मान हो सके।
- ये गाइडलाइन महज एक घटना की प्रतिक्रिया न हो, बल्कि तकनीकी बदलाव को देखते हुए जल्द से जल्द लागू करवाई जाए।
- इस गाइडलाइन में NBDSA (नेशनल बोर्ड फॉर वेलफेयर ऑफ पर्सन्स विद डिजेबिलिटीज) और अन्य हितकारियों से परमार्श कर तैयार की जाए।
सुनवाई के दौरान जस्टिस सूर्यकांत ने कहा-
ह्यूमर का स्वागत है और यह जीवन का हिस्सा है। हम खुद पर पर हंसते हैं। लेकिन जब हम दूसरों पर हंसना शुरू कर देते हैं और संवेदनशीलता को ठेस पहुंचाते हैं, सामुदायिक स्तर पर जब हास्य पैदा होता है, तो वह समस्या बन जाता है। और यही बात आज के सो-कॉल्ड इन्फ्लुएंसर्स को समझनी चाहिए। वे स्पीच को व्यावसायिक बना रहे हैं। पूरे समुदाय का उपयोग किसी विशेष वर्ग की भावनाओं को आहत करने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। यह केवल अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता नहीं है, यह व्यावसायिक अभिव्यक्ति है।

सुनवाई के दौरान जस्टिस सूर्यकांत ने इन्फ्लूएंसर्स और कॉमेडियन से कहा कि अगली बार वही बताएंगे कि उन पर कितना जुर्माना लगाना चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा-
आज मामला विकलांगों का है, अगली बार यह महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों, बच्चों, किसी का भी हो सकता है। इसका अंत कहां होगा?

इन्फ्लूएंसर्स के खिलाफ, दिव्यांगों के फाउंडेशन की तरफ से केस लड़ रहीं वरिष्ठ अधिवक्ता अपराजिता सिंह का कहना है कि इस सुनवाई में अदालत ने एक सख्त संदेश दिया है।
कैसे शुरू हुआ था विवाद?
8 फरवरी को रिलीज हुए इंडियाज गॉट लेटेंट शो के एपिसोड में रणवीर अलाहबादिया ने पेरेंट्स पर अश्लील कमेंट किया था, जिसके बाद उनके साथ-साथ शो से जुड़े सभी लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज हुई थी। ये मामला चल ही रहा था कि एनजीओ ने समय रैना पर स्टैंड-अप कॉमेडी शो में स्पाइनल मस्क्यूलर अट्रॉफी (SMA) से पीड़ित एक नेत्रहीन नवजात का मजाक उड़ाने का आरोप लगा दिया।
याचिका में फाउंडेशन ने कोर्ट को बताया था कि दस महीने पहले समय रैना ने दैट कॉमेडी क्लब में स्टैंडअप में कहा था- ‘देखो चैरिटी अच्छी बात है, करनी चाहिए। मैं एक चैरिटी देख रहा था, जिसमें एक दो महीने का बच्चा है, जिसे कुछ तो क्रेजी हो गया है। जिसके इलाज के लिए उसे 16 करोड़ रुपए का इंजेक्शन चाहिए।
समय ने शो में बैठी एक महिला से सवाल किया- मैम, आप बताइए…अगर आप वो मां होतीं और आपके बैंक में 16 करोड़ रुपए आ जाते। एक बार तो अपने पति को देखकर बोलती ना कि मंहगाई बढ़ रही है, क्योंकि कोई गांरटी नहीं है कि वो बच्चा उस इंजेक्शन के बाद भी बचेगा। मर भी सकता है। सोचो इंजेक्शन के बाद मर गया। उससे भी खराब सोचो कि 16 करोड़ के इंजेक्शन के बाद बच्चा बच गया, फिर बड़ा होकर बोले कि मैं पोएट बनना चाहता हूं।
इंडियाज गॉट लेटेंट और दिव्यांगजनों पर किए गए कमेंट्स के मामलों को क्लब किया गया था।
देखिए समय रैना-रणवीर अलाहबादिया की प्रोफाइल-







































