भारतीय स्टेट बैंक (SBI) जीएसटी रजिस्ट्रेशन नहीं रखने वाले छोटी दुकानदारों और कारोबारियों की क्रेडिट एलिजिबिलिटी मालूम करने के लिए UPI ट्रांजैक्शन के आंकड़ों का इस्तेमाल करेगा। भारतीय स्टेट बैंक इसके लिए एक नया सिस्टम डेवलप कर रहा है। एसबीआई के एक सीनियर अधिकारी ने शुक्रवार को ये जानकारी दी। एसबीआई के मैनेजिंग डायरेक्टर अश्विनी कुमार तिवारी ने मुंबई में आयोजित ग्लोबल फिनटेक समिट में कहा कि अगर किसी बिजनेस में लगातार बिक्री हो रही है तो यूपीआई ट्रांजैक्शन को जीएसटी के विकल्प के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है।
जीएसटी रजिस्टर्ड कारोबारियों को सिर्फ 10 मिनट में मिल जाता है लोन
अश्विनी कुमार तिवारी ने कहा, ”हम जीएसटी रजिस्ट्रेशन न रखने वाले कारोबारियों के लिए एक यूपीआई समाधान विकसित कर रहे हैं और यूपीआई लेनदेन को बिक्री के संकेतक के रूप में इस्तेमाल करेंगे।” उन्होंने कहा कि जीएसटी के तहत रजिस्टर्ड कारोबारियों को लोन देने की चुनौती का बैंक समाधान कर चुका है और ऐसे मामलों में 10 मिनट के अंदर लोन देने की स्थिति में है।
एसबीआई ने 18 महीनों में जीएसटी और पैन के माध्यम से दिए 1 लाख करोड़ रुपये के लोन
भारतीय स्टेट बैंक ने पिछले 18 महीनों में जीएसटी और पैन के आंकड़ों का इस्तेमाल कर 1 लाख करोड़ रुपये के लोन दिए हैं। हालांकि, जीएसटी नंबर नहीं रखने वाले कारोबारियों के मामले में कठिनाइयां हैं और ऐसे में वैकल्पिक आंकड़े महत्वपूर्ण हो जाते हैं। यूपीआई पेमेंट से जुड़े मुद्दे पर तिवारी ने कहा कि लोन देने वाले बैंक के पास हमेशा ये स्पष्ट जानकारी नहीं होती कि पैसा कहां जा रहा है। हालांकि, प्राप्तकर्ता बैंक और ट्रांजैक्शन में मदद करने वाले तीसरी पार्टी के पेमेंट ऐप के पास ये जानकारी होती है।
छोटे कारोबारियों की लोन से जुड़ी दिक्कतों को दूर करने में मिलेगी मदद
एसबीआई के मैनेजिंग डायरेक्टर अश्विनी कुमार तिवारी ने कहा कि ग्राहक की सहमति से बैंक यूपीआई पेमेंट और टेलीकॉम कंपनियों से मिलने वाले आंकड़ों जैसे अन्य स्रोतों का इस्तेमाल करने वाले मॉडल के जरिए क्रेडिट एलिजिबिलिटी का आकलन कर सकता है। तिवारी ने कहा कि एसबीआई को उम्मीद है कि नए आंकड़ों के आधार पर छोटे कारोबारियों को लोन उपलब्ध कराया जा सकेगा। इससे छोटे कारोबारियों की लोन से जुड़ी दिक्कतों को दूर करने में मदद मिलेगी।
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