आईटी सेक्टर के निवेशकों के लिए बुधवार का दिन बेहद निराशाजनक रहा। भारतीय शेयर बाजार में आईटी शेयरों में जबरदस्त बिकवाली देखने को मिली, जिसके चलते निफ्टी आईटी इंडेक्स एक ही दिन में करीब 6 फीसदी तक टूट गया। इस बड़ी गिरावट से निवेशकों के करीब ₹1.7 लाख करोड़ साफ हो गई। आपको बता दें कि साल 2026 की शुरुआत से अब तक आईटी इंडेक्स करीब 23 फीसदी गिर चुका है और सेक्टर का कुल मार्केट वैल्यू लगभग ₹6.6 लाख करोड़ घट गया है।
बुधवार को निफ्टी आईटी इंडेक्स की सभी 10 कंपनियां लाल निशान में कारोबार करती दिखीं। सबसे ज्यादा दबाव TCS, LTIMindtree और Persistent Systems जैसे बड़े शेयरों पर रहा, जिनमें 9 फीसदी तक की गिरावट दर्ज की गई। निवेशकों के बीच बढ़ती चिंताओं ने पूरे सेक्टर पर असर डाला।
AI बना नई चिंता का कारण
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का तेजी से बढ़ते इस्तेमाल के कारण आईटी सर्विस का पुराना बिजनेस मॉडल चुनौती बनता जा रहा है। निवेशकों को डर है कि ऑटोमेशन बढ़ने से कंपनियों को कम कर्मचारियों की जरूरत पड़ेगी, जिससे आईटी सर्विसेज की मांग प्रभावित हो सकती है। हालांकि जानकार यह भी मानते हैं कि AI पूरी तरह आईटी कंपनियों की जरूरत खत्म नहीं करेगा। कंपनियों को AI को अपने सिस्टम में लागू करने, डेटा मैनेजमेंट और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन के लिए अब भी तकनीकी पार्टनर्स की आवश्यकता होगी।
अमेरिका और यूरोप से कमजोर मांग
भारतीय आईटी कंपनियों का बड़ा कारोबार अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देशों से आता है। लेकिन वैश्विक आर्थिक सुस्ती के कारण इन बाजारों में टेक्नोलॉजी खर्च धीमा पड़ रहा है। इसका सीधा असर भारतीय आईटी कंपनियों के नए प्रोजेक्ट्स और ऑर्डर्स पर पड़ रहा है। इसके अलावा कंपनियां AI टूल्स पर होने वाले बढ़ते खर्च को लेकर भी सतर्क हो गई हैं, जिससे नई टेक्निकल प्रोजेक्ट्स की स्पीड धीमी पड़ सकती है।
पश्चिम एशिया तनाव ने बढ़ाई परेशानी
पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने भी बाजार की चिंता बढ़ा दी है। ऐसे माहौल में निवेशक जोखिम वाले सेक्टरों से दूरी बना रहे हैं और आईटी शेयरों में मुनाफावसूली कर रहे हैं। मार्केट एनालिस्ट्स का कहना है कि निकट भविष्य में आईटी सेक्टर पर दबाव बना रह सकता है। AI से जुड़े अवसर जरूर मौजूद हैं, लेकिन उनसे होने वाली कमाई का असर दिखने में अभी समय लगेगा।







































