
ऑफिस एसेट्स में शानदार फंड्स इनफ्लो से जुलाई-सितंबर में भारतीय रियल एस्टेट में इंस्टीट्यूशनल इंवेस्टमेंट 11 प्रतिशत बढ़कर 1.27 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया। रियल एस्टेट कंसल्टेंट कंपनी कोलियर्स इंडिया के डेटा के मुताबिक, जुलाई-सितंबर में रियल एस्टेट में इंस्टीट्यूशनल इंवेस्टमेंट 126.95 करोड़ अमेरिकी डॉलर हो गया जो एक साल पहले इसी अवधि में 114.87 करोड़ अमेरिकी डॉलर था।
इंस्टीट्यूशनल इंवेस्टमेंट में घरेलू निवेशकों की 60 प्रतिशत हिस्सेदारी
कोलियर्स इंडिया के सीईओ बादल याग्निक ने कहा, ‘‘ ये भारत के इकोनॉमिक फंडामेंटल्स और रियल एस्टेट सेक्टर की मजबूती में निवेशकों के निरंतर विश्वास को दर्शाता है।’’ रियल एस्टेट कंसल्टेंट के अनुसार, करीब 1.27 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश में से घरेलू निवेशकों ने 76.24 लाख अमेरिकी डॉलर (60 प्रतिशत हिस्सा) का निवेश किया जबकि विदेशी निवेशकों ने 50.71 लाख अमेरिकी डॉलर का योगदान दिया।
विदेशी निवेशकों के इंवेस्टमेंट में 21 प्रतिशत की गिरावट
खास बात ये है कि जुलाई-सितंबर में घरेलू स्रोतों से निवेश सालाना आधार पर 51 प्रतिशत बढ़ा जबकि विदेशी निवेशकों का निवेश 21 प्रतिशत घट गया। आंकड़ों के अनुसार, ऑफिस एसेट्स में इंस्टीट्यूशनल इंवेस्टमेंट जुलाई-सितंबर के दौरान 27 प्रतिशत बढ़कर 77.99 लाख डॉलर हो गया जो एक साल पहले इसी अवधि में 61.63 लाख डॉलर था।
रेसिडेंशियल इंवेस्टमेंट में 17 प्रतिशत की गिरावट
हालांकि, रेसिडेंशियल सेगमेंट में साल 2025 की तीसरी तिमाही में इंवेस्टमेंट 17 प्रतिशत घटकर 319.7 मिलियन अमेरिकी डॉलर रह गया, जबकि पिछले साल की इसी अवधि में ये 384.8 मिलियन अमेरिकी डॉलर था। इंस्टीट्यूशनल इंवेस्टमेंट में फैमिली ऑफिस, विदेशी कॉर्पोरेट ग्रुप, विदेशी बैंकों, प्रोपराइटरी ट्रेडिंग बुक्स, पेंशन फंड, प्राइवेट इक्विटी, रियल एस्टेट फंड-कम-डेवलपर्स, विदेशी-वित्तपोषित एनबीएफसी, लिस्टेड आरईआईटी और सॉवरेन वेल्थ फंडों से प्राप्त निवेश शामिल हैं।





































