केंद्र सरकार टेलीकॉम कंपनी एमटीएनएल की 9000 करोड़ रुपये की संपत्ति अगले वित्त वर्ष 2027-28 में बेचने की योजना बना रही है। आधिकारिक सूत्रों ने शुक्रवार को ये जानकारी दी। बताते चलें कि ये सरकारी टेलीकॉम कंपनी भारी-भरकम कर्ज के बोझ में दबी हुई है। सूत्रों का कहना है कि MTNL की संपत्ति बेचकर मिलने वाले 9000 करोड़ रुपये से सरकारी बॉन्ड गारंटी सहित अनुमानित 50,000 करोड़ रुपये के कर्ज से जूझ रही टेलीकॉम कंपनी के कर्ज को कम किया जाएगा।
बिक्री के लिए रखी जाएंगी साफ-सुथरी और विवादमुक्त 40 संपत्तियां
सूत्र ने कहा, ”सरकार की अगले वित्त वर्ष 2027-28 के दौरान एमटीएनएल की 9000 करोड़ रुपये की भूमि संपत्ति का मौद्रिकरण (बाजार पर चढ़ाने) करने की योजना है।” उन्होंने बताया कि स्वामित्व से जुड़े कई मुद्दे थे, जिन्हें सुलझा लिया गया है और अब बिक्री के लिए 40 साफ-सुथरी और विवादमुक्त संपत्तियों को रखा जाएगा।
सरकारी टेलीकॉम कंपनी एमटीएनएनल पर 50,000 करोड़ रुपये की देनदारी
सूत्र ने बताया, ”SGB (सरकारी गारंटी बॉन्ड) सहित एमटीएनएल की कुल देनदारियों और कर्ज के दायित्वों को चुकाने के लिए हमारे पास एमटीएनएल के संपत्ति आधार के रूप में पर्याप्त से ज्यादा सुरक्षा कवच है। सरकारी गारंटी बॉन्ड लगभग 30,000 करोड़ रुपये के हैं। एसजीबी को मिलाकर कुल देनदारियां लगभग 50,000 करोड़ रुपये बैठती हैं।” आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि एमटीएनएल मुख्य रूप से संपत्ति के किराए से होने वाली इनकम से अपने कर्मचारियों का सैलरी दे रही है।
BSNL की सब्सिडरी कंपनी है महानगर टेलीफोन निगम लिमिटेड
एमटीएनएल (महानगर टेलीफोन निगम लिमिटेड) एक सरकारी टेलीकॉम कंपनी है। ये, देश की प्रमुख सरकारी टेलीकॉम कंपनी BSNL (भारत संचार निगम लिमिटेड) की सब्सिडरी कंपनी है। एमटीएनल, मुख्य रूप से देश की राजधानी दिल्ली और मुंबई में लैंडलाइन और ब्रॉडबैंड सेवाएं प्रदान करती है। इसके साथ ही, ये कंपनी मोबाइल सेवाएं भी देती है। भारी नुकसान और कर्ज को ध्यान में रखते हुए अब BSNL ही MTNL का सारा बिजनेस संभाल रही है।
केंद्र ने हाल ही में IDBI Bank में 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने के प्रस्ताव को दी थी मंजूरी
भारत सरकार ने अभी हाल ही में IDBI Bank में 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। कनाडा की फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स लिमिटेड 52,878.08 करोड़ रुपये में आईडीबीआई बैंक में 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदेगी। एयर इंडिया की बिक्री के बाद ये देश का सबसे बड़ा रणनीतिक विनिवेश है। इस बिक्री में केंद्र सरकार की 30.48% और एलआईसी की 30.24% हिस्सेदारी शामिल है।
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