हम रोजमर्रा की जिंदगी में ₹500 के नोट का खूब इस्तेमाल करते हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि यह नोट आखिर बनता कैसे है और इसे छापने में कितना खर्च आता है? हाल ही में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने इस पूरी प्रक्रिया से जुड़ी दिलचस्प जानकारी शेयर की है, जिससे नोटों की दुनिया का एक नया पहलू सामने आया है।
नोट बनने की लंबी प्रक्रिया
कोई भी नोट अचानक बाजार में नहीं आ जाता। इसके लिए पहले डिजाइन तैयार किया जाता है, फिर सुरक्षा फीचर्स जोड़े जाते हैं और उसके बाद प्रिंटिंग होती है। हर नोट को खास कागज और स्याही से बनाया जाता है ताकि नकली नोटों से बचाव हो सके। भारत में नोट छापने के लिए कुल 4 हाई-सिक्योरिटी प्रेस हैं। इनमें महाराष्ट्र के नासिक और मध्य प्रदेश के देवास में स्थित प्रेस सिक्योरिटी प्रिंटिंग एंड मिंटिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (SPMCIL) के तहत आते हैं। वहीं, कर्नाटक के मैसूरु और पश्चिम बंगाल के सालबोनी में स्थित प्रेस भारतीय रिजर्व बैंक नोट मुद्रण प्राइवेट लिमिटेड (BRBNMPL) संचालित करता है।
नोट छापने का अधिकार किसके पास?
RBI के पास ही नोट छापने का अधिकार होता है। वही तय करता है कि कितने नोट छपेंगे, उनका डिजाइन कैसा होगा और किस सामग्री का इस्तेमाल होगा। इसके बाद केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद प्रेस में प्रिंटिंग का काम शुरू होता है।
₹500 का नोट छापने में कितना खर्च?
सबसे दिलचस्प बात यह है कि ₹500 का नोट छापने में सरकार को सिर्फ करीब 2.29 रुपये का खर्च आता है। यानी जिस नोट की कीमत 500 रुपये है, उसे बनाने की लागत बेहद कम होती है। इसके अलावा, ₹200 के नोट पर लगभग 2.37 रुपये और ₹100 के नोट पर करीब 1.77 रुपये खर्च होते हैं। वहीं, ₹10 और ₹20 के नोट छापने में करीब 95 पैसे लगते हैं।
पुराने नोटों का क्या होता है?
समय के साथ नोट फट जाते हैं या खराब हो जाते हैं। ऐसे में RBI स्वच्छ नोट नीति के तहत पुराने नोटों को वापस लेकर नष्ट कर देता है और उनकी जगह नए नोट जारी करता है। नोटों के अलावा सिक्कों की ढलाई भी खास टकसालों में होती है, जो मुंबई, हैदराबाद, कोलकाता और नोएडा में स्थित हैं।
क्यों है यह जानकारी खास?
₹500 का नोट सिर्फ एक कागज नहीं, बल्कि एक पूरी वैज्ञानिक और सुरक्षित प्रक्रिया का नतीजा है। इसकी छपाई में कम खर्च जरूर आता है, लेकिन इसके पीछे हाई सिक्योरिटी सिस्टम और कड़ी निगरानी काम करती है।







































