नरेंद्र मोदी आज भारत के सबसे लम्बे समय तक लगातार सेवा करने वाले निर्वाचित प्रधानमंत्री बन गये। उन्होंने पंडित जवाहर लाल नेहरू के 4,398 दिन वाले रिकॉर्ड को तोड़ा। मोदी सरकार के 12 साल भी पूरे हो गए हैं। पंडित नेहरू के मुकाबले नरेंद्र मोदी का रिकॉर्ड इतना महत्वपूर्ण क्यों है, ये समझने की जरूरत है। पंडित नेहरू एक बड़े राजनीतिक परिवार से आए थे और मोदी के परिवार का राजनीति से दूर-दूर तक कोई संबंध नहीं था।
नेहरू जी के पिता बहुत बड़े वकील थे, नेहरू जी लंदन के Harrow School में पढ़े, बैरिस्टर बने, मोदी के पिताजी की रेलवे स्टेशन पर चाय की दुकान थी। गरीब मां दूसरों के घरों में बर्तन मांजती थीं। मोदी भी स्टेशन पर चाय बेचने का काम करते थे। नेहरू जी की आज़ादी की लड़ाई में बड़ी भूमिका थी। उनके सिर पर गांधी जी का हाथ था। मोदी ने अपना रास्ता खुद बनाया। 30 साल तक RSS के प्रचारक के रूप में गली-गली, गांव-गांव भटके। जब से चुनाव लड़ना शुरु किया, कभी नहीं हारे।
मोदी की सफलता की एक बड़ी वजह ये है कि प्रचारक के तौर पर घूम-घूम कर जो सीखा, वो बाद में काम आया। 13 साल मुख्यमंत्री रहे। एक-एक दिन चुनौतियों से भरा था। चारों तरफ से हमला हो रहा था, संकट से लड़ने का ये अनुभव भी काम आया। मोदी को प्रधानमंत्री बने 12 साल हो गए, छुट्टी नहीं ली, अथक परिश्रम किया। ऐसे कई काम किए जिनके लिए इच्छाशक्ति और साहस दोनों की ज़रूरत होती है, जैसे Article 370 हटाना, पाकिस्तान को घर में घुसकर मारना। मोदी की मेहनत और हिम्मत उन्हें बाकी प्रधानमंत्रियों से अलग बनाती है। गरीबी की विरासत, संकट को अवसर में बदलने की क्षमता, मोदी के रिकॉर्ड को, मोदी की उपलब्धि को, बड़ा बनाती है।
नटराजन के खिलाफ साजिश किस ने की?
मध्य प्रदेश में कांग्रेस के साथ बड़ा खेल हो गया। राज्यसभा चुनाव में उसकी उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन के नामांकन को निर्वाचन अधिकारी ने रद्द कर दिया। एक मामूली गलती के कारण कांग्रेस जीता हुआ चुनाव हार गई। कांग्रेस के साथ खेल कैसे हुआ? तीन सीटों पर चुनाव होने थे। BJP के पास दो सीटें जीतने के अलावा भी अतिरिक्त वोट थे लेकिन तीसरी सीट जीतने के लिए 10 विधायक और चाहिए थे। कांग्रेस के पास एक सीट जीतने लायक वोट तो थे ही, बल्कि 5 अतिरिक्त वोट थे। सबको लगता था कि BJP 2 और कांग्रेस 1 सीट आसानी से जीत जाएगी लेकिन BJP ने तीसरी सीट पर उम्मीदवार खड़ा करके सबको चौंका दिया।
कांग्रेस चौकन्नी थी। उसे लगा BJP उसके विधायकों को तोड़ेगी, तो सारे विधायकों को private jet से बैंगलुरु भेजने की तैयारी हुई। लेकिन कांग्रेस के जो नेता मीनाक्षी नटराजन की उम्मीदवारी से नाराज़ थे, उन्होंने मीनाक्षी के खिलाफ एक पुरानी फौजदारी मामले की सूचना चुपके से BJP को दे दी, BJP ने शिकायत की और मीनाक्षी का नामांकन रद्द हो गया। अब BJP के तीनों उम्मीदवार निर्विरोध चुन लिए जाएंगे। कांग्रेस के विधायक बैंगलूरू के Resort में आराम करने के लिए निकले थे लेकिन प्लेन उड़ान भरता, इससे पहले ही खेल हो गया। इसे कहते हैं कहीं पे निगाहें, कहीं पे निशाना।
तृणमूल नेताओं पर अंडे कौन फेंक रहा है?
बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के नेता जहां जा रहे हैं, वहां लोग चोर-चोर के नारे लगा रहे हैं और उन पर अंडे, टमाटर फेंक रहे हैं। कोलकाता एयरपोर्ट पहुंचने पर कल्याण बनर्जी के खिलाफ लोगों ने चोर-चोर के नारे लगाए। बिधाननगर के मेयर सब्यसाची दत्ता को पुलिस जब कोर्ट में पेशी के लिए लेकर पहुंची, तो वहां लोगों ने चोर-चोर के नारे लगाए और उन पर अंडे और टमाटर फेंके। जब सब्यसाची को पुलिस अस्पताल ले गई, वहां भी लोगों ने उन पर सड़े हुए अंडों की बारिश कर दी। जो लोग चोर-चोर के नारे लगा रहे थे, जो सड़े हुए अंडे फेंक रहे थे, वे आम लोग हैं।
तृणमूल के नेता आरोप लगा रहे हैं कि ये सब बीजेपी करवा रही है, लेकिन सवाल ये है कि बीजेपी एक नेता के घर के सामने तो कार्यकर्ताओं को इकट्ठा कर सकती है, लेकिन इस तरह की तस्वीरें तो हर जगह से आ रही हैं। कल्याण बनर्जी एयरपोर्ट पहुंचे, ये तो किसी को पहले से पता नहीं था, वहां नारेबाजी हुई। आम लोगों को तो पहले से जानकारी नहीं थी कि सब्यसाची को पुलिस कब अस्पताल ले जाएगी, कब कोर्ट में पेश करेगी लेकिन दोनों जगह नारेबाजी हुई, अंडे फेंके गए।
बंगाल को लेकर दो बातें बिल्कुल साफ हैं। न पब्लिक ममता दीदी के साथ है, न उनके ज्यादातर विधायक और सांसद साथ हैं। संगठन भी बिखरने लगा है। मोटी बात ये है कि ममता के राज में बड़े पैमाने पर ज्यादतियां हुईं, लोगों के साथ जुल्म हुआ, उनकी पार्टी के नेताओं ने लूट मचाई, पार्टी में जो अच्छे लोग थे उनको बोलने से डर लगता था। अब पासा पलट गया है। बगावत हो रही है। जो लोग अभी भी खुलकर ममता का साथ दे रहे हैं। उनके पास अपना कोई जनाधार नहीं है।
कल्याण बनर्जी सबसे ज्यादा vocal हैं। उनके चुनावक्षेत्र में 7 विधानसभा सीटें हैं। यहां TMC सिर्फ 2 सीटें जीत पाईं। महुआ मोइत्रा कृष्णानगर से सांसद हैं। वहां 7 विधानसभा सीटें है, इनमें से तृणमूल केवल 3 जीत पाई। कीर्ति आजाद के चुनावक्षेत्र में 7 विधानसभा सीटें हैं लेकिन TMC को सिर्फ 1 पर जीत मिली। शत्रुघ्न सिन्हा आसनसोल से सांसद हैं, यहां भी विधानसभा की 7 सीटें हैं और सारी की सारी सीटें BJP ने जीती हैं। ये तथ्य और आंकड़ें सारी कहानी अपने आप कह रहे हैं। (रजत शर्मा)
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