पिछले महीने गोल्ड ईटीएफ में लगातार 13 महीनों से जारी शुद्ध निवेश का सिलसिला आखिरकार थम गया। निवेशकों ने मई में गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड यानी Gold ETF से 725 करोड़ रुपये निकाल लिए। बताते चलें कि ये अप्रैल 2025 के बाद पहली निकासी है। गोल्ड ईटीएफ में अप्रैल 2025 से अप्रैल 2026 तक लगातार 13 महीनों तक शुद्ध निवेश आया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोना न खरीदने की अपील और कई एसेट मैनेजमेंट कंपनियों का गोल्ड ईटीएफ में नए निवेश को रोकना इसकी मुख्य वजह रही।
मार्च 2025 में गोल्ड ईटीएफ से निकाले गए थे 5.82 करोड़ रुपये
मई 2026 से पहले मार्च 2025 में गोल्ड ईटीएफ से 5.82 करोड़ रुपये की मामूली निकासी हुई थी। कुल मिलाकर मई 2025 के बाद से अब तक गोल्ड ईटीएफ में 70,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश आया है। एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) द्वारा बुधवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, मई में गोल्ड ईटीएफ से 725 करोड़ रुपये की निकासी हुई, जबकि अप्रैल में 3,040 करोड़ रुपये का निवेश हुआ था। मार्च में निवेश 2,266 करोड़ रुपये, फरवरी में 5,255 करोड़ रुपये और जनवरी में 24,040 करोड़ रुपये रहा था।
जनवरी 2026 के बाद से गोल्ड ईटीएफ में घटता गया निवेश
इस साल जनवरी में मजबूत निवेश के बाद आने वाले महीनों में ये गति धीरे-धीरे कम होती गई, जिससे ये संकेत मिला कि नए निवेश धीरे-धीरे कम हो रहे हैं। ये उलटफेर मुख्य रूप से सोने की कीमतों में पहले आई तेजी के बाद मुनाफावसूली और निवेशकों की जोखिम लेने की प्रवृत्ति में बदलाव के कारण हुआ है। इससे कुछ निवेशक सुरक्षित निवेश से हटकर अन्य विकल्पों की ओर बढ़े हैं।
गोल्ड ईटीएफ की बिकवाली के पीछे कौन-कौन से हैं कारण
आनंद राठी वेल्थ के जॉइंट सीईओ फिरोज अजीज ने कहा कि सोने की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने, सरकार की सोना न खरीदने की अपील और कुछ एएमसी द्वारा ईटीएफ में निवेश रोकने के कारण निवेशक ज्यादा व्यावहारिक दृष्टिकोण अपना रहे हैं। इसके बावजूद, मई के अंत तक गोल्ड ईटीएफ के अधीन एयूएम बढ़कर 1,84,571 करोड़ रुपये हो गया, जो अप्रैल के अंत में 1,78,110 करोड़ रुपये था।







































