भारतीय बैंकों के साथ हुई कथित धोखाधड़ी के मामले में जांच एजेंसियों का शिकंजा और कस गया है। प्रवर्तन निदेशालय ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए उद्योगपति अनिल अंबानी और उनके बेटे जय अंशुल अंबानी से जुड़ी संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया है। यह कदम रिलायंस कम्युनिकेशंस (आरकॉम) से जुड़े एक गंभीर बैंक धोखाधड़ी और धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) के मामले में उठाया गया है।
ईडी की इस कार्रवाई में मुख्य रूप से दो बड़ी संपत्तियां शामिल हैं। पहला है अनिल अंबानी का एक फ्लैट, जो मुंबई के रिहायशी इलाके में है। जबकि दूसरा अनिल अंबानी और उनके बेटे जय अंशुल अंबानी के संयुक्त स्वामित्व वाला फार्महाउस जो खंडाला में स्थित है। ईडी के मुताबिक, कुर्क की गई इन संपत्तियों का मार्केट वैल्यू लगभग 3034 करोड़ रुपये आंका गया है। एजेंसी का कहना है कि यह कार्रवाई जनता और बैंकों के हितों की रक्षा करने और इन संपत्तियों के संभावित दुरुपयोग को रोकने के लिए की गई है।
क्या है पूरा मामला?
यह पूरा विवाद रिलायंस कम्युनिकेशंस (आरकॉम) द्वारा लिए गए भारी-भरकम कर्ज और उसके भुगतान में हुई कथित अनियमितताओं से जुड़ा है। धन शोधन का यह मामला सीबीआई द्वारा दर्ज की गई उन एफआईआर (FIRs) से उपजा है, जो भारतीय स्टेट बैंक (SBI), पंजाब नेशनल बैंक (PNB), बैंक ऑफ बड़ौदा और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) जैसी बड़ी वित्तीय संस्थाओं की शिकायतों पर आधारित थीं। इन बैंकों ने आरकॉम, अनिल अंबानी और अन्य पर लोन धोखाधड़ी का आरोप लगाया है।
परिवार का पक्ष
इस बड़ी कार्रवाई के बाद रिलायंस अनिल अंबानी ग्रुप (RAAG) के प्रवक्ता ने अपना पक्ष रखा है। प्रवक्ता के अनुसार, कुर्क की गई संपत्तियों में से कुछ हिस्सा अनिल अंबानी की मां, कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी का भी है। ग्रुप का कहना है कि इस मामले में वे कानून के अनुसार अपना पक्ष रखेंगे। यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब जांच एजेंसियां कॉरपोरेट लोन डिफॉल्ट के मामलों में काफी सख्त रुख अपना रही हैं। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में जांच की दिशा क्या होती है और अनिल अंबानी समूह इस कानूनी चुनौती का सामना कैसे करता है।






































