सुपरस्टार विजय की नई नवेली तमिलगा वेत्री कझगम (Tamilaga Vettri Kazhagam,TVK) पार्टी ने तमिलनाडु के विधानसभा चुनाव में बड़ी हलचल मचा दी है और राज्य की दो पुरानी पार्टियों- सत्तासीन द्रविड़ मुनेत्र कझगम (DMK) और मुख्य विपक्षी दल रहे अन्नाद्रमुक (AIADMK) को जबरदस्त पटखनी दी है। लेकिन इतनी बड़ी जीत के बाद भी विजय की पार्टी बहुमत से कुछ ही दूर है और सरकार बनाने के लिए मशक्कत कर रही है। इस मुश्किल घड़ी में कांग्रेस ने अपना हाथ विजय की तरफ बढ़ाया और सरकार बनाने के लिए साथ देने का वादा किया। फिर भी टीवीके मैजिकल नंबर 118 से दूर है। कांग्रेस ने विजय का साथ देने के लिए अपने पुराने सहयोगी डीएमके का साथ छोड़ दिया है। आखिर क्यों कांग्रेस विजय को इतना पसंद कर रही है। जानें इस एक्सप्लेनर में…
कांग्रेस ने टीवीके को सशर्त समर्थन दिया है और यह शर्त रखी है कि वह संविधान में विश्वास नहीं रखने वाली सांप्रदायिक ताकतों को सत्ता से दूर रखे। कांग्रेस ने कहा कि यह गठबंधन केवल तमिलनाडु में सरकार गठन तक सीमित नहीं होगा, बल्कि इसमें स्थानीय निकायों से लेकर लोकसभा और राज्यसभा तक के आगामी चुनाव भी शामिल होंगे। अब अगर कांग्रेस और राज्य के छोटे दलों को साथ लेकर विजय अपनी सरकार बना भी लेते हैं तो भी उन्हें आगे कई चुनौतियों का सामना करना होगा।
कांग्रेस ने विजय का साथ देने का फैसला क्यों किया
डीएमके का साथ छोड़ने पर कांग्रेस ने साफ कहा है कि वह जनता के जनादेश के साथ खड़ी है और उसने यह कदम भाजपा को तमिलनाडु से बाहर रखने के लिए उठाया है। हालांकि, यह कदम अचानक नहीं उठाया गया; इसकी तैयारी पिछले कुछ महीनों से चल रही थी। कांग्रेस के कुछ नेताओं को विजय की जीत का पहले से ही आभास हो गया था और कांग्रेस नेताओं ने डीएमके के बजाय टीवीके के साथ गठबंधन करने के लिए पार्टी को राजी करने के लिए पर्दे के पीछे अथक प्रयास किए। डीएमके ने कांग्रेस के इस कदम को विश्वासघात करार दिया है।
थलापति विजय
कांग्रेस को क्यों पसंद आई टीवीके
कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव में डीएमके से 40 सीटों की मांग की थी और डीएमके के नेतृत्व में बनने वाली अगली सरकार में मंत्री पद मांगा था। डीएमके ने सरकार में हिस्सेदारी की उनकी मांग के साथ-साथ पिछले चुनाव में मिली सीटों से 15 से अधिक सीटों के अनुरोध को भी नकार दिया। कांग्रेस डीएमके के सामने झुकने को तैयार नहीं थी, लेकिन अंतिम समय में कांग्रेस ने एक राज्यसभा सीट के साथ 28 विधानसभा सीटें स्वीकार कर लीं। कांग्रेस और डीएमके ने साथ में चुनाव लड़ा।
चुनाव का रिजल्ट जैसे ही स्पष्ट हुआ कि डीएमके सत्ता से बेदखल हो गई है, राहुल गांधी ने विजय को फोन करके बधाई दी और उन्हें आश्वासन दिया कि कांग्रेस उनके साथ खड़ी है। कांग्रेस ने टीवीके को समर्थन देने की औपचारिक घोषणा की।लेकिन हार के बाद भी कांग्रेस ने अपने पुराने सहयोगी को छोड़ने की बात नहीं की। कांग्रेस जानती है कि डीएमके संसद में विपक्ष की ताकत का एक प्रमुख घटक है; इसके समर्थन के बिना, कांग्रेस के लिए केंद्र सरकार को प्रभावी ढंग से घेरना मुश्किल होगा। कांग्रेस डीएमके के सामने अब यह जताने की कोशिश कर रही है कि इस गठबंधन का प्रस्ताव टीवीके ने ही रखा था।
विजय ने सरकार बनाने के लिए मांगा समर्थन
विजय ने आज राज्यपाल से मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश किया, लेकिन राज्यपाल ने कहा, बहुमत के 118 विधायकों का समर्थन लेकर आएं। फिलहाल विजय के पास खुद के 108 और कांग्रेस के पांच विधायकों का समर्थन प्राप्त है और उन्हें सरकार बनाने के लिए छह विधायक चाहिए। टीवीके ने सरकार बनाने के लिए VCK से औपचारिक रूप से समर्थन मांगा है, लेकिन VCK अभी कोई फैसला नहीं ले पाई है। वहीं, वाम दल और IUML ने TVK को समर्थन देने से साफ इनकार कर दिया है। अब PMK, VCK, या AIADMK के बागी विधायकों के समर्थन पर TVK की किस्मत टिकी हुई है।
थलापति विजय
जानिए क्या है सीटों का गणित
2026 के चुनाव में DMK को 59 सीटें मिलीं, जबकि AIADMK 47 सीटों के साथ तीसरे स्थान पर रही। कांग्रेस ने 5, पट्टाली मक्कल कट्ची (PMK) ने 4, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) ने 2 और सीपीआई ने 2 सीटें हासिल की हैं। विदुथलाई चिरुथैगल काची (VCK) ने भी 2 सीटों पर जीत दर्ज की है।
विजय बहुमत साबित नहीं कर पाए तो क्या होगा
राज्यपाल को शपथ दिलाने से पहले समर्थन के दावों की पुष्टि करने का अधिकार है और वे छह सीटों के अंतर को पाटने के लिए टीवीके-कांग्रेस गठबंधन से निर्दलीय उम्मीदवारों या छोटे दलों के हस्ताक्षरित समर्थन पत्र उपलब्ध कराने को कह सकते हैं। यदि राज्यपाल दस्तावेजी साक्ष्यों से संतुष्ट नहीं होते हैं, तो वे नियुक्ति के बाद समयबद्ध सदन परीक्षण पर जोर दे सकते हैं। यदि राज्यपाल यह निर्धारित करते हैं कि कोई भी दल या गठबंधन स्थिर प्रशासन बनाने की स्थिति में नहीं है, तो वे अनुच्छेद 356 के तहत भारत के राष्ट्रपति को एक रिपोर्ट भेज सकते हैं। इससे राष्ट्रपति शासन लागू हो सकता है, जिससे विधानसभा प्रभावी रूप से निलंबित अवस्था में चली जाएगी। हालांकि, यह अंतिम विकल्प होता है।






































