जन विश्वास (संशोधन) विधेयक, 2026 के लागू होने के बाद केंद्र सरकार ने मामूली अपराधों से जुड़े मामलों में बड़ी राहत देने की दिशा में कदम तेज कर दिए हैं। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने सभी विभागों से ऐसे लंबित मामलों की समीक्षा कर उन्हें वापस लेने पर विचार करने को कहा है, ताकि न्यायालयों पर बढ़ते बोझ को कम किया जा सके और आम लोगों के जीवन को आसान बनाया जा सके। गौरतलब है कि संसद ने गुरुवार को इस महत्वपूर्ण विधेयक को मंजूरी दी, जिसके तहत 79 केंद्रीय कानूनों के 784 प्रावधानों में संशोधन किया गया है। पीटीआई की खबर के मुताबिक, इन बदलावों के जरिए करीब 1,000 छोटे अपराधों को गैर-आपराधिक बनाते हुए उन्हें तर्कसंगत किया गया है। सरकार का मानना है कि इससे न केवल कारोबार का माहौल सुधरेगा, बल्कि अनावश्यक कानूनी झंझट और उत्पीड़न भी कम होगा।
विभागों को स्पष्ट दिशा-निर्देश देने की प्रक्रिया जारी
खबर के मुताबिक, उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग यानी DPIIT के सचिव अमरदीप सिंह भाटिया के अनुसार, नए कानूनी प्रावधानों के मद्देनजर इन मामलों की व्यापक समीक्षा की जाएगी। उन्होंने बताया कि इस संबंध में कानून मंत्रालय के साथ मिलकर विभागों को स्पष्ट दिशा-निर्देश देने की प्रक्रिया जारी है। भाटिया ने यह भी स्पष्ट किया कि अदालतों में लंबित मामलों की समीक्षा को लेकर पहले से ही सामान्य सलाह जारी है। जिन मामलों में अपराध गंभीर नहीं हैं, वहां संबंधित विभाग अदालत में आवेदन देकर मुकदमे वापस ले सकते हैं।
मामूली अपराधों से जुड़े हैं 5 करोड़ मामले
वहीं, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि देश में करीब 5 करोड़ मामले ऐसे हैं जो मामूली अपराधों से जुड़े हैं और इनमें से अधिकांश मामलों को अदालत तक पहुंचना ही नहीं चाहिए था। उन्होंने उम्मीद जताई कि नए कानून के बाद अभियोजक अदालतों से इन मामलों को बंद करने का अनुरोध करेंगे, जिससे बड़ी संख्या में मामलों का निपटारा हो सकेगा। गोयल ने कहा कि इन प्रावधानों के कारण कई स्तरों पर अनिश्चितता, भ्रष्टाचार और उत्पीड़न की स्थिति पैदा होती थी, जिसे अब समाप्त किया जा रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि केंद्र सरकार भविष्य में भी कानूनों की समीक्षा के लिए सुझावों के प्रति खुली है। मंत्री के अनुसार, 12 राज्यों ने भी जन विश्वास की तर्ज पर अपने कानूनों में छोटे अपराधों को गैर-आपराधिक बनाने की पहल की है और अन्य राज्यों को भी ऐसा करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
57 प्रावधानों में कारावास खत्म किया गया
विधेयक में कई अहम बदलाव शामिल हैं- 57 प्रावधानों में कारावास खत्म किया गया है, 158 में जुर्माना हटाया गया है, जबकि 17 प्रावधानों में सजा को कम किया गया है। इसके अलावा 113 प्रावधानों में कारावास और जुर्माने को बदलकर केवल आर्थिक दंड का प्रावधान किया गया है। साथ ही, नई दिल्ली नगर परिषद अधिनियम, 1994 और मोटर वाहन अधिनियम, 1988 में 67 संशोधन प्रस्तावित किए गए हैं, जिनका उद्देश्य आम नागरिकों के लिए नियमों को सरल और जीवन को सहज बनाना है।
पर्यावरण से जुड़े मामलों में भी राहत का प्रावधान किया गया है। भाटिया ने बताया कि वायु प्रदूषण के मानकों के पहली बार उल्लंघन पर केवल जुर्माना लगेगा और ड्राइविंग लाइसेंस तीन महीने के लिए निलंबित किया जाएगा, जबकि दोबारा उल्लंघन करने पर कड़े प्रावधान लागू होंगे। इसी तरह, ध्वनि प्रदूषण के मामलों में पहली बार केवल चेतावनी दी जाएगी, जबकि पुनरावृत्ति होने पर सामान्य कानूनी कार्रवाई की जाएगी।






































