जियो प्लेटफॉर्म्स भारत के बाहर भी अपने कदम बढ़ा रहा है। इसके लिए कंपनी अपनी स्वदेशी, एंड-टू-एंड टेलीकॉम टेक्नोलॉजी स्टैक को विकसित और विकासशील बाजारों के इंटरनेशनल ऑपरेटरों तक पहुंचा रहा है। भारी-भरकम पूंजी लगाकर स्वतंत्र नेटवर्क बनाने या सिर्फ सॉफ्टवेयर लाइसेंस बेचने के पारंपरिक तरीकों के बजाय, जियो एक ‘एसेट-लाइट’ और ‘मैनेज्ड-सर्विसेज’ मॉडल के जरिए लोकल ऑपरेटरों के साथ साझेदारी करना चाहता है।
एडवांस्ड और स्वदेशी टेक्नोलॉजी को एक्सपोर्ट करने वाला देश बन सकता है भारत
जियो का लक्ष्य पहली ऐसी भारतीय कंपनी बनना है, जो ‘मैनेज्ड-सर्विसेज’ मॉडल के जरिए अपनी स्वदेशी, एंड-टू-एंड टेलीकॉम टेक्नोलॉजी स्टैक को विकसित और विकासशील बाजारों के ऑपरेटरों तक पहुंचाए। जियो की ये पहल ग्लोबल टेलीकॉम सेक्टर में भारत की भूमिका में एक बड़े बदलाव का संकेत है। यानी, टेक्नोलॉजी इंपोर्ट करने वाले देश से बदलकर, भारत अब एडवांस्ड और स्वदेशी टेक्नोलॉजी को एक्सपोर्ट करने वाला देश बन सकता है।
आकाश अंबानी ने बताया प्लान
15 अक्टूबर 2026 को मुंबई में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में, जियो प्लेटफॉर्म्स के मैनेजिंग डायरेक्टर आकाश अंबानी ने कहा, “हमारा इंटरनेशनल रोडमैप बिल्कुल अलग है और ये एक अनोखी रणनीति है, जिसे हम दुनिया भर में पहली बार लागू करने की कोशिश कर रहे हैं।”
उन्होंने आगे बताया, “हमारा एंड-टू-एंड स्टैक पहले से ही हमारे अपने नेटवर्क पर काम कर रहा है। अब हम ऐसे पार्टनर तलाश रहे हैं, जिनके साथ मिलकर हम इसे उनके नेटवर्क पर भी लागू कर सकें। ये टेक्नोलॉजी और एंड-टू-एंड स्टैक उन पार्टनर्स के लिए बाजार में नए अवसर पैदा कर सकते हैं। मैं इस वैल्यू को न सिर्फ विकासशील बाजारों में, बल्कि विकसित बाजारों में भी पहुंचाना चाहता हूं।” जियो ने कहा कि वो रणनीतिक तालमेल, बाजार के मौकों और वैल्यू क्रिएशन के आधार पर बहुत सोच-समझकर अपने साझेदारों का चुनाव करेगी।
भविष्य के लिए तैयार इनोवेशन
जियो का इंटरनेशनल रोडमैप उस टेक्नोलॉजी पर आधारित है, जिसे भारत के जटिल बाजार में परखा जा चुका है। भारत में जियो 533 मिलियन से ज्यादा ग्राहकों को सेवाएं देता है और देश के कुल वायरलेस डेटा ट्रैफिक का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा संभालता है।
भविष्य के नेटवर्क डेवलपमेंट के लिए इसकी सॉफ्टवेयर-आधारित रणनीति का उद्देश्य मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाना और उसमें नई क्षमताएं जोड़ना है। ये टेक्नोलॉजी उन इंटरनेशनल ऑपरेटरों के लिए नए मौके पैदा कर सकती हैं, जो स्किल्ड, स्केलेबल और फ्यूचर के लिए तैयार नेटवर्क की तलाश में हैं।
ग्लोबल प्लेटफॉर्म पर भारतीय टेलीकॉम इनोवेशन को स्थापित करना
अपनी अंतरराष्ट्रीय रणनीति के जरिए, जियो ये दिखाना चाहता है कि भारतीय कंपनियां ग्लोबल लेवल पर न सिर्फ कम लागत और बड़े पैमाने के दम पर, बल्कि अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म डेवलप करके और उन्हें ऑपरेट करके भी प्रतिस्पर्धा कर सकती हैं। स्वदेशी इनोवेशन और सोच-समझकर की गई पार्टनरशिप के जरिए, जियो भारत में विकसित टेलीकॉम टेक्नोलॉजी को पूरी दुनिया के बाजारों में एक प्रतिस्पर्धी विकल्प के रूप में स्थापित करना चाहता है। कंपनी के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय विस्तार का उद्देश्य जियो के घरेलू कारोबार को बदलना नहीं, बल्कि उसे और मजबूत बनाना है।
जियो प्लेटफॉर्म्स आईपीओ
जियो प्लेटफॉर्म्स के IPO में 27 करोड़ नए शेयर शामिल हैं, जिनकी कीमत 1,065 रुपये से 1,119 रुपये प्रति शेयर के दायरे में तय की गई है। ये इश्यू 21 अक्टूबर 2026 को खुलेगा और 23 अक्टूबर को बंद होगा, जबकि 28 अक्टूबर को इसकी लिस्टिंग होने की उम्मीद है। ऊपरी प्राइस बैंड के हिसाब से, इस इश्यू का कुल आकार 30,213 करोड़ रुपये होगा। ऊपरी प्राइस बैंड पर, कंपनी की वैल्यूएशन FY26 की कमाई का लगभग 34 गुना है। इस IPO से मिलने वाली रकम में से लगभग 27,500 करोड़ रुपये का इस्तेमाल रिलायंस जियो इन्फोकॉम के कर्ज को चुकाने के लिए किया जाएगा, जबकि बाकी रकम का उपयोग सामान्य कॉर्पोरेट कार्यों के लिए होगा।
जियो की 8,110 करोड़ रुपये की ‘एंकर बुक’ के लिए लगभग 2.5 लाख करोड़ रुपये की बोलियां मिली हैं, जो कि पेश किए गए शेयरों की कुल कीमत से 30 गुना से भी ज्यादा है।
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