राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी की जांच कर रही SIT ने चंपत राय और अनिल मिश्रा को भी दोषी पाया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि चंपत राय ने चोरों के घर जाकर खुद लूट की रकम बरामद की। पुलिस चंपत राय से बार बार कहती रही कि ये गंभीर अपराध है, FIR दर्ज होनी चाहिए लेकिन चंपत राय ने FIR दर्ज कराने से इनकार कर दिया।
SIT ने कहा कि उसे 27 अप्रैल से 6 जून तक की CCTV फुटेज मिली, इसमें 72 बार चढ़ावे की गिनती में लगे लोग चोरी करते हुए दिखे। जो लोग चोरी करते हुए पकड़े गए, उन सबको चंपत राय और अनिल मिश्रा के कहने पर गिनती के काम में लगाया गया था।
हालांकि शुक्रवार को चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे की भी खबर आई लेकिन किसी ने इसकी पुष्टि नहीं की है। मेरी जानकारी ये है कि RSS और विश्व हिंदू परिषद चंपत राय और अनिल मिश्रा को बचाने के पक्ष में नहीं हैं। VHP और RSS के बड़े बड़े नेताओं की राय यही है कि निष्पक्ष जांच के लिए चंपत राय और अनिल मिश्रा अपने पदों से इस्तीफा दें।
VHP के महामंत्री बजरंग लाल बागड़ा, केन्द्रीय संगठन महामंत्री मिलिंद परांडे और केन्द्रीय सह-संगठन महामंत्री विनायक राव को अयोध्या भेजा गया था, इन तीनों ने चंपत राय और अनिल मिश्रा के साथ लंबी बात की और VHP का नेतृत्व क्या चाहता है, ये साफ-साफ साफ बता दिया।
इस बैठक के बाद ही ट्रस्ट की तरफ से चढ़ावे की लूट की FIR दर्ज करवाई गई। अगर कोई ये कहता है कि चंपत राय सीधे-सादे हैं, जिसने खुद को स्वयंसेवक कहा, उस पर भरोसा कर लिया, तो ये बड़ा बेकार का तर्क है। ये कोई एक दिन की बात नहीं है कि किसी ने धोखा दे दिया।
राम मंदिर को मिले दान में चोरी, लूट, उसकी लीपापोती और भाई-भतीजावाद लंबे अर्से से चल रहा था। चंपत राय ट्रस्ट को अपनी रियासत की तरह चला रहे थे, अपने ड्राइवर को मंदिर की चाबियां सौंप दीं, उसे गिनती के काम में लगा दिया। ड्राइवर अपने भतीजे को ले आया। देखा देखी दूसरे लोग भी चोरी में शामिल हो गए। वे लोग भी अपने भाई-भतीजों को ले आए।
चंपत राय और अनिल मिश्रा आग से खेलते रहे। कारवां गुज़र गया, ग़ुबार देखते रहे। जब बात बाहर निकल गई तो चोरों के पास रुपये रिकवर करने पहुंच गए। पैसे मिलने को अपनी काबिलियत मान बैठे। CCTV से जो सबूत इकट्ठे किए जा सकते थे, उसे सुरक्षित नहीं रखा, उल्टे अपनी हरकतों से चोरों को सावधान कर दिया।
ट्रस्ट पर एकछत्र राज करने की ललक ने उन्हें इस हालत में पहुंचा दिया कि वो शक के दायरे में आ गए। अगर चंपत राय और अनिल मिश्रा ने ट्रस्ट से इस्तीफा दिया तो ठीक किया और अगर नहीं दिया है तो SIT की रिपोर्ट आने के बाद उन्हें ट्रस्ट में रहने का कोई अधिकार नहीं है।
पूरे मामले की जांच निष्पक्ष तरीके से हो सके, इसके लिए जरूरी है कि वो मंदिर परिसर में दिखाई न दें। ये उनके लिए भी अच्छा है। कम से कम ये आरोप तो नहीं लगेगा कि जिन भाई-भतीजों ने गिनती करते करते..नोटों की गड्डियां जेबों में भरी थीं, उन्होंने उन अपनों को बचाने की कोशिश की।
ये मामला सिर्फ निगरानी में लापरवाही तक सीमित नहीं है। ये मामला सिर्फ रुपये, पैसे, जवाहरात की चोरी का नहीं है। ये प्रश्न करोड़ों राम भक्तों की आस्था के साथ विश्वासघात का है। प्रभु राम के चढ़ावे में चोरी, ऐसा पाप है जिसकी सजा कई जन्मों तक मिलेगी।
जिन लोगों ने दान पात्रों का पैसा लूटा, उनकी संपत्तियां जब्त करके पाई-पाई की वसूली होनी चाहिए। राम मंदिर के ट्रस्ट का पुनर्गठन करके ऐसे व्यक्तियों को जिम्मेदारी सौंपी जानी चाहिए, जिन्हें प्रशासन का अनुभव हो, जो नए जमाने की चुनौतियों को समझते हों।
.APK files से सावधान !
अब खबर आपको सावधान करने वाली। अगर आपके पास किसी अनजान नंबर से या किसी परिचित के नंबर से कोई टेक्स्ट मैसेज आए या व्हाटसैप मैसेज आए, उसमें आपका फोन, बिजली या गैस कनेक्शन कटने की बात कह कर डराया गया हो तो आप ऐसे मैसेज पर क़तई क्लिक न करें।
इस मैसेज को तुरंत डिलीट कर दें, क्योंकि अगर आपने इसे क्लिक कर दिया तो आपका फोन हैक होगा और मिनटों में ही आपका बैंक खाता खाली हो जाएगा।
मुंबई, दिल्ली और अहमदाबाद में शुक्रवार को इस तरह का साइबर फ्रॉड करने वाले कई गिरोह पकड़े गए हैं। इस गिरोह ने कम से कम पचास करोड़ की ठगी और हजारों लोगों को चूना लगाया। मुंबई पुलिस ने छह लोगों को गिरफ्तार किया है।
ये लोग APK फाइल भेज कर लोगों के फोन हैक करते थे और बैंक खातों से पैसे उड़ाते थे।
अहमदाबाद पुलिस ने उस गिरोह को पकड़ लिया जो APK फाइल्स जनरेट करता था, फिर ये फाइल्स साइबर अपराधियों को बेचता था जिनके जरिए साइबर ठग लोगों के बैंक खाते खाली कर रहे थे। अहमदाबाद पुलिस ने झारखंड के तीन लोगों को पकड़ा है, तीनों का कनेक्शन साइबर क्राइम के लिए बदनाम झारखंड के जामताड़ा से है।
APK का फुल फ़ॉर्म Android Package Kit है। जब भी आप गूगल के प्ले स्टोर से कोई ऐप डाउनलोड करते हैं तो उस ऐप को चलाने के लिए जितनी ज़रूरी इलेक्ट्रॉनिक इन्फॉर्मेशन होती है, वो APK फाइल में ही दर्ज होती है। इसको App प्रोग्राम इंस्ट्रक्शन कहते हैं।
जब आप गूगल के प्ले स्टोर से कोई App या APK फाइल डाउनलोड करते हैं, तो वो पूरी तरह से सेफ होती है क्योंकि गूगल उसकी ऑथेंटिकेशन करके ही प्ले स्टोर पर डालता है लेकिन, आजकल साइबर क्रिमिनल्स बैंक, गैस एजेंसी, RTO के नाम पर ऐसी नकली APK फाइल्स डेवेलप कर लेते हैं, उसे लोगों के फोन पर भेजते हैं।
जैसे ही कोई इस फाइल को ओपन करता है तो उसके फोन का सारा कन्ट्रोल हैकर के पास पहुंच जाता है। फोन की सारी जानकारी हैकर के पास पहुंच जाती है। बैंक के OTP और पासवर्ड भी उनके पास पहुंच जाते हैं और वो लोगों के खाते आसानी से खाली कर देते हैं।
दूसरी बड़ी बात ये है कि आपके फोन में जितने भी लोगों के फोन नंबर सेव होते हैं, साइबर क्रिमिनल्स उन सबको आपके फोन नंबर से वही मैसेज भेजे देते हैं, जो आपको भेजा गया था। अगर उनमें से किसी ने इसे क्लिक किया तो वो भी ठगी का शिकार हो जाता है।
साइबर क्रिमिनल बड़े सरकारी अफसरों और प्राइवेट कंपनियों के अधिकारियों भी को निशाना बनाने की कोशिश रहे हैं। गृह मंत्रालय ने बड़ी कंपनियों के अधिकारियों को अलर्ट रहने को कहा है। मोटी बात ये है कि आप सावधान रहें। अगर आपके फोन पर कोई इस तरह का मैसेज आए तो उसे क्लिक न करें। अगर गलती से APK फाइल डाउनलोड हो जाए तो तुरंत फोन को स्विचऑफ कर दें।
इसके बाद बैंक से संपर्क करके अपने खाते को ब्लॉक करवाएं और इस फ्रॉड की जानकारी 1930 पर दें। जितनी जल्दी 1930 को फोन करेंगे, साइबर फ्रॉड करने वालों के पकड़े जाने की संभावना उतनी ज्यादा बढ़ जाएगी। (रजत शर्मा)
देखें: ‘आज की बात, रजत शर्मा के साथ’ 26 जून, 2026 का पूरा एपिसोड






































