
चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने सोमवार को कहा कि शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के सदस्य देशों ने क्षेत्र की दक्षता और सामाजिक विकास को बढ़ाने के लिए एक डेवलपमेंट बैंक स्थापित करने का फैसला लिया है। वांग ने कहा कि बैंक की स्थापना के लिए चीन के एक प्रस्ताव को सदस्य देशों के बीच 10 सालों के विचार-विमर्श के बाद मंजूरी मिली। उन्होंने कहा कि नया बैंक क्षेत्र की दक्षता और सामाजिक विकास को बढ़ाएगा। हालांकि, उन्होंने बैंक की स्थापना की कोई समय-सीमा नहीं बताई।
शी चिनफिंग ने डेवलपमेंट बैंक के गठन में तेजी लाने का किया था आग्रह
वांग यी ने कहा कि एससीओ इस महत्वपूर्ण प्रक्रिया की शुरुआत करेगा और यूरो-एशियाई क्षेत्र में एक और बहुपक्षीय मंच होगा। ये न सिर्फ सदस्य देशों के लिए, बल्कि हमारे क्षेत्र के लिए भी खुशी की बात है। इससे पहले चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने एससीओ के सदस्य देशों से एक डेवलपमेंट बैंक के गठन में तेजी लाने का आग्रह किया था। उन्होंने कहा कि 10 देशों के इस समूह की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए ऐसा करना चाहिए। चीन ने ब्रिक्स के नव विकास बैंक (NDB) और एशियाई निवेश अवसंरचना बैंक (AIIB) की तर्ज पर एक डेवलपमेंट बैंक स्थापित करने का प्रस्ताव रखा था।
शंघाई सहयोग संगठन में दूसरा सबसे बड़ा शेयरधारक है भारत
शंघाई सहयोग संगठन में भारत दूसरा सबसे बड़ा शेयरधारक है। चीन स्थित NDB और AIIB को शुरू में IMF, वर्ल्ड बैंक और एशियाई विकास बैंक (ADB) का प्रतिस्पर्धी माना जाता था, हालांकि अब ये बैंक सह-वित्तपोषण प्रतिरूप के साथ उनके साथ मिलकर काम कर रहे हैं। उन्होंने यहां आयोजित 25वें शिखर सम्मेलन के अपने उद्घाटन भाषण में कहा कि एससीओ दुनिया का सबसे बड़ा क्षेत्रीय संगठन बन गया है, जिसमें 26 देश शामिल हैं, 50 से ज्यादा क्षेत्रों में सहयोग है और इसका संयुक्त आर्थिक उत्पादन लगभग 30,000 अरब अमेरिकी डॉलर है।







































