आखिरकार चुनाव नतीजे के 10 दिन बाद केरल को नया मुख्यमंत्री मिल गया। कांग्रेस नेता वीडी सतीशन केरल के नए सीएम होंगे। दरअसल, केरल में CM की रेस में पहले तीन नाम चल रहे थे। केसी वेणुगोपाल, वीडी सतीशन और रमेश चेन्नीथला। इनमें सीएम की रेस में सबसे आगे केसी वेणुगोपाल चल रहे थे। वेणुगोपाल, राहुल गांधी की पंसद थे और 11 मई को दिल्ली में राहुल गांधी ने वेणुगोपाल से अकेले में मुलाकात भी की थी। लेकिन सवाल ये है कि केसी वेणुगोपाल, राहुल गांधी की पहली पसंद थे तो फिर वीडी सतीशन ने बाजी कैसे मार ली? आइए जानते हैं इसकी इनसाइड स्टोरी।
इन 7 प्वाइंट्स में जानिए कारण
1) विधायक दल की बैठक के बाद शुरू हुए विरोध प्रदर्शनों ने कांग्रेस आला कमान को सोचने पर मजबूर किया कि ग्रास रूट सेंटीमेंट की अनदेखी भारी पड़ सकती है। इसलिए और कंसल्टेशन के लिए सभी कार्यकारी अध्यक्षों, पूर्व प्रदेश अध्यक्षों और अनुशासन कमेटी के इंचार्ज को दिल्ली तलब कर पूछा गया कि ये सोशल मीडिया पर जो चल रहा है उसमें कितनी सच्चाई है? ज्यादातर नेताओं ने कहा कि ग्रास रूट को नजरअंदाज करने के नतीजे काफी खराब होंगे। उसके बाद एके एंटनी जैसे वरिष्ठ नेताओं से भी राय शुमारी की गई।
2) वीडी सतीशन शुरू से IUML की पसंद थे, कांग्रेस को IUML की तरफ से बार-बार सतीशन के नाम पर दबाव बनाया जा रहा था।
3) राहुल गांधी ने इस फैसले के जरिए ये संदेश देने की कोशिश की है कि उनके करीबी भी अगर जमीन पर समर्थन नहीं जुटा पाते तो वो भी दौड़ से बाहर हो सकते हैं।
4) केसी वेणुगोपाल के साथ विधायकों का समर्थन जरूर था, इसकी एक वजह उनके खेमे के ज्यादातर विधायकों को टिकट मिलना भी था। कुछ लोग मानते हैं कि विधायकों के समर्थन की एक वजह के सी की दिल्ली में राहुल गांधी से करीबी भी थी। कोई विधायक उनके विपरीत दिखने का रिस्क नहीं लेना चाहता था।
5) वीडी सतीशन, प्रियंका और सोनिया गांधी के भी करीबी माने जाते हैं। उन्हें नेता प्रतिपक्ष बनाने में भी पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की भूमिका अहम थी।
6) उत्तर केरल में IUML की भूमिका अहम है, खास तौर पर वायनाड जैसी लोकसभा में और 10 से 12 विधानसभाओं में भी उनका प्रभाव है।
7) केसी वेणुगोपाल ने राज्य में कांग्रेस बेहतर चुनाव लड़े इसके लिए हर संभव कदम उठाए, फिर चाहे रिसोर्सेज की बात हो या फिर रूठे नेताओं को मानने की। वह खुद भी मुख्यमंत्री बनना चाहते थे, लेकिन वह 6 साल से केरल की राजनीति से दूर हैं। लिहाजा उनका पब्लिक कनेक्ट उतना नहीं था जितना सतीशन का था।
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