केरल में विधानसभा चुनाव के बाद मतगणना शुरू हो गई है। यहां केरल के शुरुआती रुझान भी सामने आ रहे हैं। अभी तक के शुरुआती रुझानों में कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (UDF) को बढ़त मिलती दिख रही है। इसके साथ ही आजादी के बाद पहली बार ऐसा हो रहा है कि देश के किसी भी राज्य में अब लेफ्ट की सरकार नहीं रहेगी। केरल आखिरी राज्य था, जहां लेफ्ट की सरकार बची हुई थी, हालांकि अब केरल भी लेफ्ट के हाथ से छूटता नजर आ रहा है। बता दें इससे पहले भी त्रिपुरा और बंगाल से लेफ्ट साफ हो चुका है।
आखिरी राज्य भी हाथ से निकला
बता दें कि केरल के अलावा पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा में भी लेफ्ट की सरकार पहले रह चुकी है, लेकिन इन दोनों जगहों पर भी लेफ्ट का सफाया हो चुका है। साल 2011 में पश्चिम बंगाल में लेफ्ट की सरकार एक बार बाहर हुई तो फिर दोबारा वापसी नहीं कर सकी। वहीं त्रिपुरा में भी साल 2018 में लेफ्ट की सरकार को जनता ने सत्ता से बाहर का रास्ता दिखा दिया। अब केरल में भी लेफ्ट की सरकार गिरती हुई नजर आ रही है। केरल में यूडीएफ की जीत के साथ ही पूरे देश से लेफ्ट का सफाया हो जाएगा। इसका मतलब है कि देश के किसी भी राज्य में लेफ्ट की सरकार नहीं बचेगी।
केरल में हार की तरफ एलडीएफ
दरअसल, केरल के शुरुआती रुझानों की बात करें तो यहां यूडीएफ 90 से अधिक सीटों पर आगे चल रही है, जबकि वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF) 40 से कुछ अधिक सीटों पर आगे है। इसके अलावा यहां राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) कुल 140 सीटों में से पांच सीटों पर आगे है। वहीं केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी की राज्य इकाई के प्रमुख सनी जोसेफ ने कहा कि यह पार्टी के पक्ष में रुझान का संकेत देता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यूडीएफ 100 सीटों का आंकड़ा पार कर लेगा।
पिनरई के 12 मंत्री पीछे
वहीं दूसरी तरफ केरल में जारी मतगणना के बीच यहां कम से कम 12 मंत्री अपने-अपने क्षेत्रों में पीछे हैं। मुख्यमंत्री पिनरायी विजयन अपनी मौजूदा सीट धर्मदम में पिछड़ रहे हैं, जिसे उनका गढ़ माना जाता है। खबरों के मुताबिक, मंत्री वीना जॉर्ज, एम बी राजेश, ओ आर केलू, आर बिंदू, जे चिंचूरानी, पी राजीव, के बी गणेश कुमार, वी एन वासवन, वी शिवनकुट्टी, वी अब्दुरहमान, ए के शशीद्रन और रोशी ऑगस्टीन अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों में पीछे हैं।
यह भी पढ़ें-







































