त्तर प्रदेश में रफ़्तार का नया युग शुरू हो चुका है। यह प्रदेश अब केवल अपनी संस्कृति और इतिहास के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी विश्वस्तरीय सड़कों के लिए भी पहचाना जा रहा है। राज्य के दूर दराज हिस्सों को राजधानी लखनऊ और दिल्ली से जोड़ने के लिए एक्सप्रेसवे का एक विशाल जाल बिछाया गया है। इन हाई-स्पीड कॉरिडोर ने न केवल यात्रा के समय को 60% तक कम कर दिया है, बल्कि व्यापार, पर्यटन और औद्योगिक विकास के लिए नए द्वार भी खोल दिए हैं। आइए उत्तर प्रदेश की तस्वीर बदलने वाले उन 5 बड़े एक्सप्रेसवे के बारे में जानते हैं।
1. गंगा एक्सप्रेसवे (594 किमी)
गंगा एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश का सबसे महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट है। यह 594 किलोमीटर लंबा कॉरिडोर मेरठ को सीधे प्रयागराज से जोड़ेगा। 6 लेन का यह एक्सप्रेसवे राज्य का सबसे लंबा एक्सप्रेसवे होगा। इसके तैयार होने से पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश के बीच का फासला चंद घंटों का रह जाएगा।
2. पूर्वांचल एक्सप्रेसवे (341 किमी)
पूर्वांचल एक्सप्रेसवे लखनऊ को गाजीपुर से जोड़ता है। इस एक्सप्रेसवे ने पूर्वी उत्तर प्रदेश की किस्मत बदल दी है। अब यहां के किसान, व्यापारी और छोटे उद्योगपति अपने उत्पादों को बहुत कम समय में दिल्ली और लखनऊ जैसे बड़े बाजारों तक पहुंचा पा रहे हैं।
3. आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे (302 किमी)
यह एक्सप्रेसवे राज्य के दो सबसे प्रमुख शहरों, आगरा और लखनऊ को जोड़ता है। इसकी वजह से पर्यटन को भारी बढ़ावा मिला है। दिल्ली से आगरा आने वाले पर्यटक अब आसानी से लखनऊ तक का सफर तय कर लेते हैं। यह एक्सप्रेसवे व्यापारिक दृष्टिकोण से भी रीढ़ की हड्डी साबित हुआ है।
4. बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे (296 किमी)
चित्रकूट के पास से शुरू होकर यह एक्सप्रेसवे आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे से जुड़ता है। इसने बुंदेलखंड जैसे कम विकसित क्षेत्र को सीधे दिल्ली-एनसीआर से जोड़ दिया है। इससे इस क्षेत्र में डिफेंस कॉरिडोर और अन्य उद्योगों के लिए निवेश बढ़ रहा है।
5. यमुना एक्सप्रेसवे (165 किमी)
ग्रेटर नोएडा को आगरा से जोड़ने वाला यमुना एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश का पहला अत्याधुनिक एक्सप्रेसवे था। इसने पश्चिमी यूपी में औद्योगिक क्रांति की नींव रखी और आज यह व्यापार और पर्यटन का प्रमुख मार्ग बन चुका है।






































