घरेलू शेयर बाजार में गुरुवार को भारी उतार-चढ़ाव के बीच निवेशकों को जोरदार झटका लगा, जब प्रमुख सूचकांक लाल निशान में बंद हुए। बीएसई सेंसेक्स 582.86 अंक गिरकर 76,913.50 पर आ गया, जबकि NSE Nifty 50 भी 180.10 अंकों की कमजोरी के साथ 23,997.55 पर फिसल गया। बाजार में यह गिरावट व्यापक बिकवाली का संकेत देती है, जिसमें कई दिग्गज शेयर दबाव में नजर आए। वैश्विक संकेतों की कमजोरी, निवेशकों की सतर्कता और चुनिंदा सेक्टर्स में बिकवाली ने मिलकर बाजार के इस कमजोर प्रदर्शन को और गहरा कर दिया।
आईटी को छोड़कर सभी सूचकांक लाल निशान में बंद
सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो आईटी को छोड़कर सभी सूचकांक लाल निशान में बंद हुए। मेटल इंडेक्स में करीब 2% की गिरावट दर्ज की गई, जबकि पीएसयू बैंक, प्राइवेट बैंक, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और रियल्टी सेक्टर में लगभग 1-1% की कमजोरी रही। इसके अलावा, मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी दबाव देखने को मिला। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स करीब 1% टूट गया, जबकि स्मॉलकैप इंडेक्स में 0.5% की गिरावट दर्ज की गई।
क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
विशेषज्ञों के मुताबिक, पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और ब्रेंट क्रूड के 120 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचने से महंगाई, मुद्रा स्थिरता और कंपनियों के मार्जिन पर दबाव को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। रुपये के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचने से स्थिति और बिगड़ गई, जिससे विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली तेज हुई और बाजार की समग्र धारणा कमजोर हो गई।
बीएसई सेंसेक्स में शामिल कंपनियों का गुरुवार को प्रदर्शन।
एनएसई पर टॉप-5 लूजर स्टॉक्स
| सिंबल | LTP | बदलाव | %बदलाव | वॉल्यूम (लाख) | वैल्यू (₹ करोड़) |
|---|---|---|---|---|---|
| ETERNAL | 246.60 | -7.43 | -2.92 | 727.00 | 1,787.34 |
| TMPV | 342.40 | -10.30 | -2.92 | 126.71 | 433.02 |
| HINDALCO | 1,037.00 | -30.20 | -2.83 | 43.93 | 458.80 |
| HINDUNILVR | 2,254.00 | -60.40 | -2.61 | 44.35 | 1,011.26 |
| TATASTEEL | 211.40 | -4.48 | -2.08 | 248.95 | 526.43 |
रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 2 पैसे कमजोर
भारतीय मुद्रा में कमजोरी का दौर जारी है। गुरुवार को रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 2 पैसे की गिरावट के साथ 94.90 (अस्थायी) के रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद हुआ। भारतीय रुपया पर दबाव की मुख्य वजह वैश्विक बाजारों में डॉलर की मजबूती और विदेशी निवेशकों की सतर्कता मानी जा रही है। वहीं अमेरिकी डॉलर की मजबूती के चलते आयातकों की मांग बढ़ी, जिससे रुपये पर अतिरिक्त दबाव बना रहा। विशेषज्ञों के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता भी रुपये की कमजोरी के प्रमुख कारणों में शामिल हैं।







































