उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (UP RERA) ने घर खरीदारों को कुछ बहुत जरूरी और महत्वपू्र्ण सलाह दी हैं। यूपी रेरा ने बुधवार को कहा कि घर खरीदारों को फ्लैट खरीदते समय कार्पेट एरिया को प्राथमिकता देनी चाहिए। अथॉरिटी ने कहा कि कार्पेट एरिया एक हाउसिंग यूनिट के अंदर उपलब्ध वास्तविक इस्तेमाल योग्य रहने की जगह का प्रतिनिधित्व करता है। यूपी रेरा ने कहा कि रियल एस्टेट (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2016 और संबंधित नियमों ने अपार्टमेंट के बारे में जानकारी और बिक्री के लिए कार्पेट एरिया को ‘मानक आधार’ के रूप में निर्धारित किया है।
फ्लैट में कार्पेट एरिया का ही इस्तेमाल कर सकते हैं घर खरीदार
डेवलपर को यूपी रेरा पोर्टल पर फ्लैट के नंबर, टाइप और कार्पेट एरिया की पूरी डिटेल देना आवश्यक है। अथॉरिटी ने एक बयान में कहा, ”कार्पेट एरिया घर खरीदार द्वारा इस्तेमाल के लिए उपलब्ध वास्तविक एरिया को दर्शाता है। खरीदारों को सोच-विचार कर फैसला लेने के लिए इस आधार पर हाउसिंग यूनिट्स का मूल्यांकन करना चाहिए।” यूपी रेरा ने कहा कि अपार्टमेंट से जुड़ी स्पेशल बालकनी, बरामदों और खुली छतों के बारे में भी जानकारी का खुलासा करना जरूरी है, जबकि सुपर बिल्ट-अप एरिया की डिटेल्स कानून के तहत अनिवार्य नहीं है।
क्या होता है सुपर बिल्ट-अप एरिया और इसमें क्या-क्या आता है
उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी ने कहा, ”फ्लैट को अक्सर सुपर बिल्ट-अप एरिया के आधार पर बढ़ावा दिया जाता है। इसमें कॉरिडोर, सीढ़ियां, लिफ्ट, लॉबी और क्लब हाउस जैसी सामान्य सुविधाओं का आनुपातिक हिस्सा भी शामिल होता है।” यूपी रेरा ने कहा, ”सुपर बिल्ट-अप एरिया कभी-कभी बताए गए साइज और फ्लैट के अंदर उपलब्ध वास्तविक इस्तेमाल योग्य एरिया के बीच अंतर को छिपा सकता है।”
प्रॉपर्टी डील को फाइनल करने से पहले यूपी रेरा पोर्टल पर जरूरी बातें चेक करने की सलाह
यूपी रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी ने घर खरीदारों से किसी भी प्रॉपर्टी डील को फाइनल करने से पहले यूपी रेरा पोर्टल पर कार्पेट एरिया समेत प्रोजेक्ट से जुड़ी डिटेल्स की जांच करने का आग्रह किया है। यूपी रेरा ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य रियल एस्टेट सेक्टर में ज्यादा पारदर्शिता लाना और घर खरीदारों को भ्रामक जानकारी से बचाना है।







































