मुंबई: राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार) की कार्यकारी अध्यक्ष और एमपी सुप्रिया सुले ने NDS में शामिल होने की अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि उनकी पार्टी किसी के दबाव में काम करने वाली नहीं है। सुप्रिया सूले ने साफ तौर पर कहा कि उनकी पार्टी INDIA गठबंधन का हिस्सा है और डीलिमिटेशन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर गठबंधन के सभी दल मिलकर फैसला करेंगे।
डीलिमिटेशन पर अभी कोई प्रस्ताव नहीं
सुप्रिया सुले ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि अभी तक केंद्र सरकार की ओर से डीलिमिटेशन से जुड़ा कोई विधेयक या आधिकारिक प्रस्ताव उनके पास नहीं आया है। ऐसे में समर्थन या विरोध का सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने कहा कि जब भी ऐसा कोई प्रस्ताव आएगा तो INDIA गठबंधन में शामिल सभी दलों के साथ विस्तृत चर्चा के बाद पार्टी अपना रुख तय करेगी।
महिला रिजर्वेशन पहले लागू करने की मांग
वहीं महिला आरक्षण से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि संसद से पारित 33 प्रतिशत महिला आरक्षण कानून को पहले लागू किया जाना चाहिए। सुप्रिया के मुताबिक, न तो INDIA गठबंधन और न ही एनसीपी (एसपी) ने डीलिमिटेशन की मांग की है।
अमित शाह और किरण रिजिजू के साथ बैठक में क्या हुआ?
सुप्रिया सुले ने यह भी खुलासा किया कि बजट सत्र के दौरान केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने उन्हें, असदुद्दीन ओवैसी और अरविंद सावंत को चर्चा के लिए बुलाया था। वहां गृह मंत्री अमित शाह भी मौजूद थे। बैठक में सभी राज्यों में मौजूदा लोकसभा सीटों में 50 प्रतिशत वृद्धि के एक संभावित फॉर्मूले पर चर्चा हुई थी ताकि किसी राज्य के साथ जनसंख्या आधारित परिसीमन में किसी प्रकार का असंतुलन न हो। हालांकि बाद में आए विधेयक में इस प्रस्ताव का उल्लेख नहीं था। सुप्रिया सुले कहा कि शरद पवार के नेतृत्व में INDIA गठबंधन ने इस विषय पर सरकार को एक चिट्ठी भी लिखी थी और सर्वदलीय बैठक बुलाकर चर्चा करने की मांग की थी। उनका कहना था कि लोकतंत्र में ऐसे बड़े फैसले व्यापक सहमति से होने चाहिए।
सभी आठ सांसद एकजुट
एनडीए में शामिल होने की चर्चाओं पर सुप्रिया सुले ने दोहराया कि आज की तारीख में पार्टी के भीतर ऐसा कोई प्रस्ताव या चर्चा नहीं है। उन्होंने कहा कि सभी आठ सांसद एकजुट हैं और पार्टी का हर फैसला सामूहिक रूप से लिया जाएगा।
दोनों एनसीपी के विलय पर क्या बोलीं सुप्रिया?
एनसीपी के दोनों दलों के विलय के सवाल पर वह भावुक हो उठीं। उन्होंने कहा कि उनके भाई अजित पवार की इच्छा थी कि दोनों दल साथ आएं, लेकिन उनके निधन के बाद अब इस विषय पर कोई चर्चा नहीं है। उन्होंने कहा कि फिलहाल पार्टी का पूरा ध्यान जनता से जुड़े मुद्दों और संगठन पर है।
बता दें कि महाराष्ट्र की राजनीति में मंगलवार को उस समय हलचल तेज हो गई, जब दिल्ली और मुंबई में अलग-अलग स्तर पर महत्वपूर्ण राजनीतिक बैठकें हुईं। महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। वहीं, मुंबई में सीएम देवेंद्र फडणवीस की एनसीपी अजीत पवार गुट और एनसीपी शरद पवार गुट के नेताओं से मुलाकात हुई है। एक ही दिन में हुई इन मुलाकातों को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज होने लगी।
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