अयोध्या में श्रीराम जन्म स्थान पर भव्य मंदिर का निर्माण और रामलला एवं धर्मध्वजा के प्रतिष्ठापन को लेकर प्रतिभाओं का सम्मान एवं अभिनंदन का कार्यक्रम नागपुर के रेशमबाग स्थित डॉ. हेडगेवार स्मारक समिती द्वारा संपन्न हुआ। यह कार्यक्रम सरसंघचालक डॉ मोहन भागवत, गोविंददेव गिरी जी महाराज, सुरेश उपाख्य भैया जी जोशी (अध्यक्ष ,डॉ हेडगेवार स्मारक समिति) की उपस्थिति में संपन्न हुआ। इस दौरान संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि राम राज्य केवल राजा के कारण नहीं होता।
क्या बोले मोहन भागवत?
संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि मंदिर श्री राम जी की इच्छा से बना। जब तक सबकी लकड़ी नहीं लगती गोवर्धन नहीं उठता। उठता तो भगवान की करांगुली पर ही है। परंतु उनकी करांगुली तब तक काम नहीं करती जब तक बाकी लोग लकड़ी नहीं लगाते। मंदिर भी ऐसे ही बना। सनातन धर्म का उत्थान होने के लिए भारतवर्ष का उत्थान अवश्यंभावी है। 150 साल पहले योगी अरविंद ने घोषित कर दिया है। जैसे-जैसे एक-एक लकड़ी लगेगी, वैसे-वैसे भगवान की करांगुली का बल इस संकल्प के पूर्ति के लिए प्रवाहित होता रहेगा। आप ऐसा विचार कीजिए कि उत्थान की प्रक्रिया शुरू हो गई 1857 से। 2014 में जब यहां लोकसभा के चुनाव परिणाम आए, शपथ विधि हुआ नए सरकार का मोदी जी के नेतृत्व में तो लंदन के गार्डियन ने लेख लिखा- “ऑन दिस डे द इंडियंस हैव फाइनली सेड गुड बाय टू द ब्रिटिश टेक्निकली।” हमने गुड बाय तो 15 अगस्त 1947 को ही कर दिया परंतु अभी भी हम निश्चित नहीं थे।
भारत का उत्थान होना है- मोहन भागवत
मोहन भागवत ने कहा कि भारत का उत्थान होना है। लेकिन भारत क्या है? कौन सा उत्थान होना है? भारत इंडिया है क्या? इस पशोपेश में सारा समय जा रहा था। एक रास्ता पकड़ा अपने देश ने। इतना बड़ा आंदोलन नहीं होता तो मंदिर बनता क्या? इतना बड़ा आंदोलन हो गया लेकिन सत्ता में राम मंदिर बनाने वाले लोग नहीं बैठते तो राम मंदिर बनता क्या? राम मंदिर बनने का निर्णय हो गया लेकिन नींव बनाने वाले नहीं मिलते तो आगे कैसे खड़ा होता? भारतवर्ष के एक-एक व्यक्ति की लकड़ी लगी है। तब श्री राम की करांगुली ने अपना चमत्कार दिखाया है। और यह प्रक्रिया है। ये आगे चलेगी। विश्व को धर्म देने वाला भारत खड़ा होना है।
‘हिंदुस्तान को हिंदू राष्ट्र कहने पर लोग हंसने थे’
मोहन भागवत ने कहा कि संघ की 100 साल की यात्रा कैसे चली? संघ के पास था तो कुछ नहीं। ना प्रसिद्धि थी, ना सत्ता थी, ना प्रचार था, ना साधन थे, ना धन था। डॉक्टर हेडगेवार को अनुयाई मिले उनकी आयु क्या थी? उनका अनुभव क्या था? परंतु एक श्रद्धा और विश्वास ले चले- हिंदुस्तान हिंदू राष्ट्र है। लोग हंसते थे, वो प्रारंभ के दिन की बात है नहीं। राम मंदिर बनने तक हिंदुस्तान हिंदू राष्ट्र है कहने पर हंसने वाले लोग थे। आज हंसने वाले लोग ही कह रहे हैं कि हिंदुस्तान हिंदुओं का देश है। हमको कहते हैं कि आप घोषित करो। हम कहते हैं घोषित करवाने की जरूरत नहीं, जो है वो है। सूरज पूरब से उगता है। ये घोषित करना चाहिए क्या? वह पूरब से ही उगता है। वह जहां से उगता है उसको हम पूरब कहते हैं। तो भारत हिंदू राष्ट्र है। आज सबको मान्य है। लेकिन उस समय क्या था? उस समय सब लोग खिल्ली उड़ाते थे।
‘राम राज्य केवल राजा के कारण नहीं होता’
मोहन भागवत ने कहा कि राम राज्य केवल राजा के कारण नहीं होता। प्रजा के कारण भी होता है। श्री राम के गुणों का वर्णन जैसे रामायण में है, राम राज्य के अधर के नाते वैसे राम राज्य की प्रजा कैसी थी इसका भी वर्णन है। तो मंदिर निर्माण अयोध्या में जो होना था हो गया। राम राज्य में ही राम राज्य की प्रजा के आचरण का जो वर्णन है ऐसा आचरण मेरा बने। मेरे परिवार का बने और हमारे कारण अपने समाज में उस आचरण का प्रचार प्रसार हो। प्रत्यक्ष आचरण शुरू हो। हम जहां हैं जिस संस्था में है, संगठन में है, व्यक्तिगत कुछ अपना प्रभाव है, जितना प्रभाव है, अपनी जो कुछ शक्ति है, वह लगाकर इसको करते रहना छोटे बड़े दायरे में। यह हम करेंगे तो भगवान की इच्छा तो है ही कि दुनिया को धर्म देने वाला भारत खड़ा होना चाहिए। कितनी जल्दी होगा यह हमको तय करना है। हम सब लोग लगेंगे तो विश्व में फैले प्रचंड हिंदू समाज की इतनी शक्ति है कि अगर सोच कर शुरू करेगा तो एक दिन में कर देगा।
मोहन भागवत ने कहा कि विश्व की आज जो आवश्यकता है, वह होना है, वो भारत के द्वारा ही होगा और भारत का उत्थान भारत की संतान ही करेगी और कोई देश भारत का उद्धार नहीं करेगा। भारत बड़ा होकर सारी दुनिया का उद्धार करेगा। ये विधि लिखित है। उसको पूर्ण करने में हमारा हाथ लगे तो जल्दी से जल्दी कम से कम नुकसान में हो जाएगा। इतना विचार हम सब लोग आज के निमित्त करें।
ये भी पढ़ें- विश्व के पहले ‘भारतदुर्गा मंदिर’ का हुआ शिलान्यास, मोहन भागवत ने कहा- ‘शक्ति के बिना कुछ नहीं होता है’







































