भारत ने ब्रिटेन के साथ हुए एफटीए के तहत रियायती कस्टम ड्यूटी पर गाड़ियों के आयात का रास्ता साफ करते हुए कोटा आधारित शुल्क रियायत का लाभ लेने के लिए आयातकों की मंजूरी प्रक्रिया अधिसूचित कर दी है। ये व्यवस्था 15 जुलाई से लागू होगी। व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते (CETA) के तहत भारत दोनों पक्षों के लिए निर्धारित कोटा के साथ मोटर वाहन आयात पर टैरिफ को लगभग 110 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत करेगा। भारत इस व्यापार समझौते के लागू होने के पहले 15 सालों के दौरान ब्रिटेन से पारंपरिक इंजन वाले पैसेंजर कार की 3.78 लाख यूनिट्स के आयात की रियायती कस्टम ड्यूटी पर अनुमति देगा।
टीआरक्यू के लिए आवेदन करने के लिए कौन होगा पात्र
विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने 9 जुलाई की सार्वजनिक सूचना में कहा, ”भारत-ब्रिटेन (CETA) के तहत कोटा आधारित शुल्क दर (TRQ) के आवंटन की प्रक्रिया अधिसूचित की जाती है।” इसमें कहा गया कि आयातित खेप की सीमा शुल्क निकासी के समय भारत में आयातक को ब्रिटेन के संबंधित प्राधिकरण द्वारा जारी मूल प्रमाणपत्र (सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन) प्रस्तुत करना होगा। डीजीएफटी ने कहा, ” केवल ब्रिटेन में विनिर्मित वाहनों के मूल उपकरण विनिर्माता (ओईएम), अथवा उनके विधिवत अधिकृत डीलर/चैनल पार्टनर ही टीआरक्यू के लिए आवेदन करने के पात्र होंगे।”
टीआरक्यू प्रमाणपत्रों की संचयी संख्या पर निगरानी रखेगा डीजीएफटी
व्यापार महानिदेशालय ने ये भी कहा कि पात्रता के लिए प्रत्येक आवेदक को ब्रिटेन स्थित वाहन विनिर्माता (ओईएम) द्वारा जारी पूर्व-क्रय समझौता प्रस्तुत करना होगा। इसमें टीआरक्यू वर्ष के दौरान आपूर्ति की जाने वाली गाड़ियों की संख्या का उल्लेख होगा। डीजीएफटी ने कहा, ” इन आयातों के लिए वर्ष का अर्थ भारत में 1 जनवरी से 31 दिसंबर तक की कैलेंडर अवधि होगी। डीजीएफटी जारी किए गए टीआरक्यू प्रमाणपत्रों की संचयी संख्या पर निगरानी रखेगा। निर्धारित टीआरक्यू सीमा पूरी होने के बाद कोई टीआरक्यू प्रमाणपत्र जारी नहीं किया जाएगा।” उसने कहा कि ये प्रमाणपत्र अधिकतम 12 महीने या कैलेंडर वर्ष की समाप्ति तक, जो भी पहले हो, वैध रहेंगे। डीजीएफटी ने कहा, ”टीआरक्यू के तहत आयात करने वाले आयातक रियायती सीमा शुल्क का लाभ अंतिम खरीदार या उपभोक्ता तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।”
किन गाड़ियों पर कितनी और कैसे मिलेगी रियायत
ब्रिटेन से भारत में आयात के लिए पारंपरिक इंजन वाले यात्री वाहनों का कोटा 5वें साल में विभिन्न श्रेणियों में बढ़कर 37,000 यूनिट्स हो जाएगा। इसके साथ ही कस्टम ड्यूटी क्रमिक रूप से घटकर अंतिम रूप से 10 प्रतिशत रह जाएगी। इसके बाद टैरिफ में और कोई कटौती नहीं होगी। पहले वर्ष में 3,000 सीसी से ज्यादा पेट्रोल कार और 2,500 सीसी से ज्यादा डीजल कारों का कोटा 10,000 यूनिट होगा। इन पर कस्टम ड्यूटी 110 प्रतिशत से घटाकर 30 प्रतिशत किया जाएगा। 1,500 सीसी पेट्रोल, 2,500 सीसी डीजल और 3,000 सीसी पेट्रोल कारों के लिए कोटा 5,000 यूनिट होगा और इन पर टैरिफ 66 प्रतिशत से घटाकर 50 प्रतिशत किया जाएगा।
40,000 ब्रिटिश पाउंड से कम कीमत वाली गाड़ियों के लिए कोई रियायत नहीं
दस्तावेज के अनुसार, 1,500 सीसी तक की इंजन क्षमता वाले मास मार्केट की कारों के लिए समझौते के पहले साल में 5,000 यूनिट्स के आयात की अनुमति होगी और इन पर कस्टम ड्यूटी 66 प्रतिशत से घटाकर 50 प्रतिशत किया जाएगा। समझौते के पहले साल में इन तीनों श्रेणियों में कुल 20,000 यात्री कारों के आयात की अनुमति होगी। भारत ने 40,000 ब्रिटिश पाउंड (सीआईएफ) से कम कीमत वाली गाड़ियों के लिए अपना बाजार नहीं खोला है। इससे बड़े पैमाने के बाजार वाले इलेक्ट्रिक व्हीकल (ईवी) सेगमेंट को पूरी सुरक्षा मिलेगी, जिसमें भारत टाटा मोटर्स, महिंद्रा एंड महिंद्रा और मारुति सुजुकी जैसी घरेलू कंपनियों के माध्यम से वैश्विक नेतृत्व हासिल करना चाहता है।
इलेक्ट्रिक, हाइब्रिड और हाइड्रोजन कारों के लिए पहले 5 साल तक कोई छूट नहीं
भारत ने इलेक्ट्रिक, हाइब्रिड और हाइड्रोजन से चलने वाली पैसेंजर कारों के लिए पहले 5 सालों में कोई रियायत नहीं दी है। हालांकि, छठे साल से 40,000 ब्रिटिश पाउंड (सीआईएफ) से 80,000 ब्रिटिश पाउंड (सीआईएफ) (दोनों सहित) कीमत वाली ऐसी गाड़ियों पर कस्टम ड्यूटी 50 प्रतिशत कर दी जाएगी और इनके लिए 400 यूनिट्स का कोटा होगा। वहीं, 80,000 ब्रिटिश पाउंड (सीआईएफ) से ज्यादा कीमत वाली ऐसी गाड़ियों पर टैरिफ 40 प्रतिशत होगा और इनके आयात की सीमा 4,000 निर्धारित की गई है।
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