
टाटा मोटर्स लिमिटेड को शुक्रवार को राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (NCLT) की मुंबई बेंच से अपने रीस्ट्रक्चरिंग प्रोग्राम के लिए मंजूरी मिल गई, जिससे 1 अक्टूबर से उसके पैसेंजर व्हीकल्स और कमर्शियल व्हीकल्स बिजनेस के अलग होने का रास्ता साफ हो गया है। NCLT ने अपने आदेश में उस पूरी व्यवस्था योजना को मंजूरी दे दी, जिसके तहत टाटा मोटर्स के कमर्शियल व्हीकल्स बिजनेस को टीएमएल कमर्शियल व्हीकल्स लिमिटेड (टीएमएलसीवी) में अलग किया जाएगा, जबकि पैसेंजर व्हीकल्स बिजनेस को टाटा मोटर्स के नाम अधीन समेकित किया जाएगा, जिसका नाम बदलकर टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स लिमिटेड कर दिया जाएगा।
टाटा मोटर्स के निवेशकों को कैसे अलॉट होंगे शेयर
इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, टाटा मोटर्स की ये दोनों कंपनियां स्वतंत्र रूप से लिस्ट होंगी और शेयरहोल्डरों को टाटा मोटर्स में रखे गए प्रत्येक शेयर के बदले टीएमएलसीवी का 1 शेयर मिलेगा। इस योजना में कमर्शियल व्हीकल यूनिट को ₹2,300 करोड़ मूल्य के नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर ट्रांसफर करने का भी प्रावधान है। टाटा मोटर्स ने कहा कि इस कदम से वैल्यू में बढ़ोतरी होगी और दोनों बिजनेस को ज्यादा रणनीतिक फोकस, बेहतर गतिशीलता और स्पष्ट पूंजी आवंटन मिलेगा।
टाटा मोटर्स की लीडरशिप में कई बड़े बदलाव
पुनर्गठन से पहले, टाटा मोटर्स ने अपनी लीडरशिप में भी कई बड़े बदलाव किए हैं। कमर्शियल व्हीकल (सीवी) डिवीजन का नेतृत्व कर रहे गिरीश वाघ, टीएमएलसीवी के एमडी और सीईओ का कार्यभार संभालेंगे। वर्तमान में पैसेंजर ईवी वर्टिकल का नेतृत्व कर रहे शैलेश चंद्रा, टाटा मोटर्स के एमडी और सीईओ बनेंगे, जो पैसेंजर व्हीकल बिजनेस को देखेंगे।
फाइनेंशियल लीडरशिप में भी होंगे फेरबदल
इस बदलाव में फाइनेंशियल लीडरशिप में भी बदलाव शामिल है। ग्रुप के चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर पीबी बालाजी 17 नवंबर को अपने पद से इस्तीफा देकर यूनाइटेड किंगडम में जगुआर लैंड रोवर पीएलसी के सीईओ का पद संभालेंगे। उनकी जगह धीमान गुप्ता लेंगे, जो वर्तमान में टाटा पैसेंजर इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के सीएफओ हैं और टाटा मोटर्स में ग्रुप सीएफओ की भूमिका निभाएंगे। हालांकि, बालाजी टाटा मोटर्स के बोर्ड में एक नॉन-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर के रूप में कंपनी से जुड़े रहेंगे।







































